उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आवारा कुत्तों की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश और केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए जवाबदेही तय करने के बावजूद, वाराणसी नगर निगम इस दिशा में गंभीर पहल नहीं कर रहा है। इसका नतीजा यह है कि आवारा कुत्ते आए दिन लोगों को, खासकर बच्चों को घायल कर रहे हैं।
गुरुवार को दशाश्वमेध के पत्थर गली मोहल्ले में एक दर्दनाक घटना हुई, जब आठ साल की बच्ची भव्या पर कुत्तों का झुंड टूट पड़ा। भव्या पास की दुकान से सामान खरीदकर पैदल घर लौट रही थी, तभी अचानक एक कुत्ते ने उसके हाथ में रखा सामान छीनने की कोशिश की। इस हमले में बच्ची जमीन पर गिर गई, जिसके बाद चार-पांच और कुत्ते भी वहां आ गए और उन्होंने बच्ची को डंठलियों से काटना शुरू कर दिया।
बच्ची की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग बाहर आए और लाठी-डंडों से कुत्तों को भगाकर भव्या की जान बचाई। घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें यह पूरी वारदात कैद हो गई है।
भव्या के पिता मनीष यादव ने बताया कि उनके मोहल्ले में आवारा कुत्तों की संख्या बहुत बढ़ गई है, लेकिन नगर निगम के पास शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। भव्या को तुरंत इलाज के लिए कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे रेबीज का टीका और प्राथमिक चिकित्सा दी गई।
मोहल्ले के लोग इस घटना से दहशत में हैं और बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की लापरवाही से नाराज हैं। उनका कहना है कि न केवल बच्चे बल्कि इलाके में आने-जाने वाले हर व्यक्ति को कुत्तों के हमलों का खतरा बना रहता है।