भारत में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर और जटिल समस्या बनी हुई है। ‘नारी 2025’ नामक राष्ट्रीय वार्षिक रिपोर्ट ने इस मुद्दे पर चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं, जो महिला सुरक्षा की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाते हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, देश की लगभग 40% महिलाएं अपने शहरों में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। यह आंकड़ा शहरों के सार्वजनिक स्थानों, ऑफिस, स्कूल, कॉलेज और ट्रांसपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा की मौजूदा स्थिति का दर्दनाक सच बयान करता है।
बेटियों की सुरक्षा: हर माता-पिता की चिंता
अक्सर देखा जाता है कि बेटियां जब घर से बाहर जाती हैं, खासकर देर रात या नौकरी और पढ़ाई के लिए तो परिवार के लोग चिंतित हो जाते हैं। कई बार माताएं बेटियों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहती हैं। जैसे मैंने भी अपने अनुभव में महसूस किया है, कि जब मैं देर रात ऑफिस से घर लौटती हूं तो मेरी मां बार-बार फोन कर मेरी सलामती जानती हैं। यह चिंता हर मां-बाप की होती है, जो अपनी बेटियों के लिए रात-दिन एक चिंता बनी रहती है।
महिलाओं के साथ बढ़ता उत्पीड़न और भय
भारत के सड़कों, बाजारों, स्कूल-कॉलेज, ऑफिस और सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के साथ लगातार उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती रहती हैं। महिलाएं अक्सर घूरती नजरों, अश्लील टिप्पणियों, छेड़खानी और अनचाहे शारीरिक संपर्क का सामना करती हैं। कई बार महिलाएं इन घटनाओं का विरोध करती हैं, लेकिन शर्मिंदगी और भय के कारण कुछ महिलाएं चुप रह जाती हैं।
‘नारी 2025’ रिपोर्ट: डराने वाले तथ्य
- रिपोर्ट में देश के 31 शहरों की 12,770 महिलाओं का सर्वेक्षण किया गया है।