अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने हाल ही में भारत के खिलाफ कई विवादित बयान दिए हैं। उन्होंने भारत पर रूस से तेल खरीदने का आरोप लगाया कि वह यूक्रेन के युद्ध को बढ़ावा दे रहा है। इसके साथ ही नवारो ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले का बचाव भी किया। नवारो का यह रुख दोनों देशों के बीच पहले से नाजुक रिश्तों को और जटिल बना रहा है। एशिया विशेषज्ञ और पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्रियों के सलाहकार इवान ए. फेगेनबाम ने नवारो के भारत विरोधी बयानों की आलोचना की है। उन्होंने नवारो को ‘बेलगाम तोप’ कहा है जो बिना किसी संयम के बयानबाजी कर रहे हैं। फेगेनबाम के अनुसार नवारो के बयान अमेरिका-भारत संबंधों में दशकों की मेहनत से बने भरोसे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने नवारो के आरोपों को ‘बेतुका’ और ‘इतिहास से परे’ बताया।
नवारो के आरोप और उनकी सच्चाई
नवारो ने दावा किया कि भारत रूस से प्रति दिन 15 लाख बैरल तेल आयात करता है और उसका रिफाइनर 10 लाख बैरल से ज्यादा पेट्रोलियम निर्यात कर रहा है, जिससे रूस को युद्ध के लिए धन मिल रहा है। उन्होंने इसे ‘तेल का फंडिंग सेंटर’ कहा। हालांकि भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि उसका तेल खरीदना आर्थिक जरूरतों पर आधारित है। साथ ही भारत ने अमेरिका के इस एकतरफा टैरिफ नीति को भी गलत बताया है।
अमेरिका-भारत संबंधों पर पड़ सकता है बड़ा असर
फेगेनबाम ने चेतावनी दी है कि नवारो जैसे व्यक्तियों के कारण अमेरिका और भारत के बीच रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस रुख को नहीं बदला गया तो दशकों की कड़ी मेहनत बर्बाद हो सकती है। इसके लिए प्रशासन में बदलाव की जरूरत हो सकती है ताकि दोनों देशों के बीच सहयोग को फिर से मजबूती दी जा सके।