कानपुर के लेदर उद्योग पर गहराया संकट, समुद्री मालभाड़ा 488% बढ़ा; 1000 करोड़ का निर्यात अटका

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अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों की कमी और कंटेनर की उपलब्धता प्रभावित होने से शिपिंग फ्रेट में बेतहाशा बढ़ोतरी ने कानपुर के लेदर फुटवियर और लेदर गुड्स उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

निर्यातकों के मुताबिक कुछ महीने पहले तक जिस 40 फीट हाई-क्यूब कंटेनर का इटली तक भेजने का समुद्री भाड़ा करीब 1,300-1,500 डालर था, वह 17 अगस्त 2026 तक बढ़कर 7,650 डालर पहुंच गया। यानी करीब छह गुणा तक की बढ़ोतरी ने निर्यात की लागत का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।

बढ़ते मालभाड़े के कारण विदेशी खरीदार भी अतिरिक्त लागत उठाने से पीछे हट रहे हैं। इसका सीधा असर शिपमेंट पर पड़ा है और पिछले करीब एक महीने से कानपुर से लगभग 1,000 करोड़ रुपये के लेदर और लेदर प्रोडक्ट्स का निर्यात आर्डर रुका हुआ है। माल – भाड़ा में बड़े अंतर के कारण खरीदारों ने भी घाटा सहने से मना कर दिया और आर्डर की आपूर्ति रोक दी है।लेदर निर्यातकों के अनुसार इटली के लिए 40 फीट हाई-क्यूब कंटेनर का माल – भाड़ा 24 फरवरी 2026 को 1,300 डालर यानी 270841 रुपये था वह 19 मार्च को यह 3,316 डालर, 19 जून को 3,745 डालर, एक जुलाई को 5,125 डालर और 15 जुलाई को 5,591 डालर पहुंच गया।7 अगस्त को यही दर 7,650 डॉलर यानी 856622 रुपये दर्ज की गई। लगभग छह लाख रुपये का माल – भाड़ा अंतर निर्यातकों पर भारी पड़ रहा है। फरवरी के मुकाबले अगस्त में समुद्री माल भाड़े में करीब 488 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जो प्रति वर्गफुट 0.90 रुपये से बढ़कर 2.86 रुपये हो गया है।

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