एक स्कूटी के पंजीकरण ने कागजों में मृत ताराचंद के जीवित होने का राज खोल दिया। आरोपित ने वर्ष 1999 से कोर्ट में लंबित मुकदमे में गिरफ्तारी और कार्रवाई से बचने के लिए फर्जी प्रपत्रों की मदद से खुद को वर्ष 1998 में मृत दर्शा दिया था। पिछले वर्ष पांच नवंबर को मुकदमे के वादी राजकुमार ने ताराचंद को हरीपर्वत क्षेत्र में स्कूटी पर घूमते देखा तो उसके जीवित होने का राज खुला।
ताराचंद ने फर्जी प्रपत्रों से खुद का मृत दिखा बंद कराई थी कार्रवाई
राजकुमार शर्मा बनाम विद्या देवी आदि के बीच वर्ष 1999 से कूटरचित प्रपत्रों एवं धोखाधड़ी से संबंधित मामला न्यायालय में लंबित है। मुकदमे की सुनवाई के दाैरान विद्या देवी, चुन्नीलाल गोयल और रोशनलाल वर्मा की म़ृत्यु हो गई। न्यायालय ने उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी थी। इसी मुकदमे मे हरीपर्वत के गांधी नगर निवासी ताराचंद शर्मा भी आरोपित था। उसके विरुद्ध गैर जमानतीय वारंट जारी किए गए।
न्यू आगरा के ताराचंद के कोर्ट में हाजिर होने पर भेजा जेल
गिरफ्तारी से बचने के लिए ताराचंद शर्मा पक्ष की ओर से वर्ष 2013 में नगर निगम से बना फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र पेश किया गया, जिसमें उसे वर्ष 1998 में मृत दर्शाया गया था। हरीपर्वत पुलिस ने भी न्यायालय में 13 अगस्त 2013 को अपनी आख्या में उसके मृत होना बताया। जिस आधार पर न्यायालय ने कार्रवाई समाप्त कर दी। पांच नवंबर 2025 को वादी राजकुमार ने उसे घटिया आजम खां क्षेत्र में एक स्कूटी पर घूमते देखा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

