गाजियाबाद के पटेल नगर में करीब 30 वर्ष पहले बनाई गई पानी की टंकी अब नगर निगम के लिए बेकार ढांचा बनकर रह गई है। निर्माण के बाद से आज तक इस टंकी से कभी पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी।
ढांचा भी पुराना और जर्जर हो चुका
वर्षों से टंकी केवल इलाके में पहचान और लैंडमार्क के तौर पर इस्तेमाल हो रही है। यह टंकी कभी काम नहीं आई। लंबे समय से उपयोग में नहीं आने के कारण अब इसका ढांचा भी पुराना और जर्जर हो चुका है। तकनीकी स्थिति का आकलन कराने के लिए इसकी जांच का काम अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को सौंपा गया है।
जांच रिपोर्ट में टंकी को असुरक्षित बताया
वहीं, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जांच रिपोर्ट में टंकी को असुरक्षित बताया जाता है तो इसे गिराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसी नंदग्राम की दो टंकियों की भी यही कहानी है।
वर्ष 1989 बनी दोनों टंकियों का कभी इस्तेामल नहीं किया गया। बिना इस्तेमाल के ही ये जर्जर हो चुकी है। 37 वर्ष पुरानी ये टंकियां अपनी आयु पूरी हो चुकी हैं। इनको भी ध्वस्त कराने की तैयारी है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

