स्थानीय अंचल के किरकिरा मौजा में 16.07 एकड़ रैयती भूमि को लेकर ग्रामीणों और वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के बीच विवाद गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खतियान एवं पंजी-दो में दर्ज रैयती भूमि पर वन विभाग ने पौधारोपण कर कब्जा कर लिया है। जबकि संबंधित भूमि का वर्ष 2025-26 तक लगान अंचल कार्यालय से नियमित रूप से कट रहा है। इसके बावजूद भूमि को वन सीमा से मुक्त नहीं किया जा रहा है। इससे ग्रामीण खेती, मकान निर्माण एवं अन्य कार्यों से वंचित हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि मामले को लेकर वे कई बार वन विभाग, अंचल कार्यालय एवं जिला कार्यालय का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होंगे।
ग्रामीणों के अनुसार, किरकिरा गांव के प्लॉट संख्या 17, खाता संख्या 168 की 62 डिसमिल तथा प्लॉट संख्या 21 की 1.78 एकड़ भूमि नेमु जोलहा के नाम खतियान में दर्ज है।
इसी प्रकार प्लॉट संख्या 18, खाता संख्या 32 की 3.78 एकड़ भूमि नजीम मियां, प्लॉट संख्या 19, खाता संख्या 204 की 1.52 एकड़ भूमि सोबरन जोलहा, प्लॉट संख्या 15, खाता संख्या 212 की 2.3 एकड़ एवं प्लॉट संख्या 20, खाता संख्या 213 की 74 डिसमिल भूमि हेमन, झमन व गोपाल मियां, प्लॉट संख्या 12, खाता संख्या 173 की 2.28 एकड़ भूमि बड़का पुनीत जोलहा, प्लॉट संख्या 13, खाता संख्या 187 की 1.5 एकड़ भूमि भिखारी जोलहा, प्लॉट संख्या 11, खाता संख्या 172 की 1.41 एकड़ भूमि लटू एवं रामू जोलहा तथा प्लॉट संख्या 14, खाता संख्या 213 की 32 डिसमिल भूमि हेमन, कनी व मनी जोलहा के नाम दर्ज है।
ग्रामीणों का कहना है कि उक्त सभी भूमि का लगान वर्ष 2025-26 तक अंचल कार्यालय से निर्गत हो चुका है। इतना ही नहीं, इन जमीनों की खरीद-बिक्री एवं दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी सामान्य रूप से होती रही है। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा भूमि पर पौधारोपण कर उसे वन क्षेत्र के रूप में चिह्नित कर दिया गया है।
इससे रैयतों को अपनी ही जमीन पर खेती करने और घर बनाने में कठिनाई हो रही है।ग्रामीणों ने उपायुक्त एवं दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रैयती भूमि को वन सीमा से मुक्त कराने की मांग की है, ताकि भू-स्वामी अपनी जमीन का उपयोग कर सकें।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

