जिला कृषि विभाग में कार्यरत किसान सलाहकारों एवं अन्य कर्मियों के भविष्य निधि अंशदान में गबन मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब जांच के दौरान सामने आया है कि कर्मचारियों के ईपीएफ मद में काटी गई राशि जमा कराने के लिए विभाग को जो चालान प्रस्तुत किए जाते थे, वे फर्जी पाए गए हैं। ईपीएफ कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट में जमा राशि से संबंधित सभी चालानों को संदिग्ध और फर्जी बताया गया है।
इस खुलासे के बाद विभागीय हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। जानकारी के अनुसार आत्मा में कार्यरत लेखापाल हर्ष रंजन पर किसान सलाहकारों तथा अन्य कर्मियों के ईपीएफ अंशदान की राशि के गबन का आरोप है।
आरोप है कि कर्मचारियों के वेतन से प्रतिमाह कटने वाली ईपीएफ राशि को नियमानुसार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में जमा कराने के बजाय लेखापाल ने निजी लाभ के लिए उपयोग किया। मामले की जांच में यह भी सामने आया है कि ईपीएफ कार्यालय को जमा दिखाने के लिए फर्जी चालान तैयार कर विभागीय अधिकारियों को भ्रमित किया जाता रहा।
सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों के अंशदान की राशि जिस बैंक खाते में जमा होती थी, उस खाते से लेखापाल का व्यक्तिगत मोबाइल नंबर जुड़ा हुआ था। मोबाइल नंबर लिंक होने के कारण खाते के संचालन और लेन-देन की पूरी जानकारी सीधे लेखापाल को मिलती थी।
आरोप है कि इसी व्यवस्था का लाभ उठाकर वह कर्मचारियों की कटौती की राशि निकालकर अपने निजी खाते में स्थानांतरित कर देता था। बाद में ईपीएफ कार्यालय का फर्जी चालान प्रस्तुत कर यह दिखाया जाता था कि राशि नियमानुसार जमा कर दी गई है।
जांच में यह भी तथ्य सामने आया है कि इस पूरे खेल में कार्यालय के एक एटीएम कर्मी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बताया जाता है कि कई बार कटौती की गई राशि पहले उक्त कर्मी के खाते में भेजी जाती थी और बाद में वहां से वापस लेखापाल के खाते में स्थानांतरित कर दी जाती थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस खाते में राशि भेजी जाती थी, उससे भी लेखापाल का ही मोबाइल नंबर लिंक बताया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन इन तथ्यों ने गबन के मामले को और गंभीर बना दिया है। मामले की जड़ वर्ष 2021 में खोले गए उस बैंक खाते से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान की राशि जमा होती थी।
जानकारी के अनुसार तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी ने विभागीय नियमों को दरकिनार कर इस खाते के संचालन की जिम्मेदारी कृषि कार्यालय के बजाय आत्मा को सौंप दी थी। इतना ही नहीं, खाते को आत्मा के लेखापाल के व्यक्तिगत मोबाइल नंबर से लिंक कर दिया गया। जानकारों का मानें तो सरकारी अंशदान से जुड़े खाते के संचालन में इस प्रकार की व्यवस्था वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा देने वाली साबित हो सकती है।
बताया जाता है कि वर्ष 2024 के बाद किसान सलाहकारों के वेतन से नियमित रूप से ईपीएफ अंशदान की कटौती शुरू हुई। इसी अवधि में कथित गबन का खेल भी तेज हो गया। कर्मचारियों को लंबे समय तक यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि उनकी भविष्य निधि की राशि नियमित रूप से जमा की जा रही है। लेकिन जब कई कर्मियों ने अपने ईपीएफ खाते की स्थिति की जांच कराई तो जमा राशि नहीं मिलने की बात सामने आई। इसके बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया।
किसान सलाहकारों ने जब इस संबंध में वर्तमान जिला कृषि पदाधिकारी से शिकायत की तो उन्होंने तत्काल मामले को गंभीरता से लिया। शिकायत मिलने के बाद लेखापाल को तलब कर चार दिनों के भीतर सभी कर्मचारियों के ईपीएफ खाते को अद्यतन कराने और स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया।
हालांकि इसी दौरान एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया। सूत्रों के अनुसार किसान सलाहकारों को मार्च और अप्रैल माह का वेतन जारी किया गया, लेकिन इन दो महीनों के वेतन से काटी गई ईपीएफ राशि की भी निकासी कर ली गई। इससे कर्मचारियों में आक्रोश और बढ़ गया है।
वहीं विभागीय सूत्रों का मानना है कि बैंक खाते, मोबाइल नंबर लिंकिंग, फर्जी चालान और राशि हस्तांतरण से जुड़े सभी दस्तावेजों की गहन जांच के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
उधर मामले के मुख्य आरोपी लेखापाल हर्ष रंजन मंगलवार को भी कार्यालय से फरार रहे। उनके लगातार अनुपस्थित रहने से कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। विभागीय स्तर तथा पुलिस स्तर पर मामले की जांच जारी है तथा संबंधित दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।


