प्रधानमंत्री मोदी के देहरादून आगमन पर उमड़ा जनसैलाब, राष्ट्रीय पर्व जैसा दिखाई दिया माहौल

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 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन और दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कारिडोर के उद्घाटन ने मंगलवार को गढ़ीकैंट स्थित जसवंत ग्राउंड को जनउत्साह, अनुशासन और भव्यता के अद्वितीय मंच में बदल दिया।

सुबह से ही कार्यक्रम स्थल की ओर लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी और दोपहर 12 बजे तक पूरा परिसर जनसमर्थन के विराट सागर में परिवर्तित हो गया। जहां तक नजर जाती, वहां केवल उत्साह से भरे चेहरे, लहराते तिरंगे और प्रधानमंत्री के स्वागत में उमड़ा अभूतपूर्व जनसमूह दिखाई दे रहा था।

प्रधानमंत्री के निर्धारित आगमन से कई घंटे पहले ही जसवंत ग्राउंड खचाखच भर चुका था। मैदान के भीतर बैठने की व्यवस्था भरने के बाद लोग आसपास के खुले हिस्सों और मार्गों पर खड़े होकर कार्यक्रम का इंतजार करते रहे। युवाओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया, वहीं उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा में पहुंची महिलाओं ने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पर्वतीय अंचलों से लेकर मैदानों तक का पूरा उत्तराखंड एक ही स्थान पर सिमट आया हो।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ का आंकड़ा 50 हजार के पार रहा। देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल और आसपास के जनपदों से लोग बसों, निजी वाहनों और समूहों में सुबह से ही पहुंचने लगे थे।

राष्ट्रीय पर्व जैसा दिखाई दिया माहौल
जसवंत ग्राउंड के भीतर और बाहर माहौल किसी बड़े राष्ट्रीय पर्व जैसा दिखाई दे रहा था। केसरिया ध्वज, तिरंगों की कतारें, प्रधानमंत्री के स्वागत संदेशों वाले बैनर और विकास योजनाओं के होर्डिंग पूरे क्षेत्र को विशेष पहचान दे रहे थे। प्रधानमंत्री के मंच पर पहुंचते ही ‘मोदी-मोदी’ व ‘भारत माता की जय’ के नारों ने वातावरण को ऊर्जा से भर दिया। तालियों की गूंज देर तक मैदान में प्रतिध्वनित होती रही और हजारों मोबाइल कैमरे उस क्षण को कैद करते नजर आए।

सजावट में झलकी देवभूमि की गरिमा
पूरा कार्यक्रम स्थल फूलों की झालरों, आकर्षक पृष्ठभूमि और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान दर्शाने वाले अलंकरण से सुसज्जित था। मंच के आसपास हिमालय, देवस्थलों, लोककला और पारंपरिक प्रतीकों की झलक विशेष आकर्षण बनी रही। प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य मंच तक हर हिस्से में सुविचारित सजावट ने आयोजन को विशिष्ट स्वरूप दिया।

जनउत्साह बना आयोजन की सबसे बड़ी पहचान
पंडाल के भीतर महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे प्रधानमंत्री की एक झलक पाने को उत्सुक दिखाई दिए। सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत सघन होने के बावजूद पूरे परिसर में उत्सव जैसा उल्लास बना रहा। पुलिस और प्रशासन ने यातायात, पार्किंग और प्रवेश व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए, जिससे विशाल भीड़ के बावजूद अनुशासन बना रहा।

कार्यक्रम के बाद भी देर तक बना रहा उत्सव का माहौल
प्रधानमंत्री के संबोधन और कार्यक्रम समाप्ति के बाद भी बड़ी संख्या में लोग मैदान में रुके रहे। परिवारों और युवाओं ने आयोजन स्थल के बाहर तस्वीरें खिंचवाईं और इसे देहरादून के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। कई लोगों के लिए यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकास के नए अध्याय का प्रत्यक्ष साक्षी बनने जैसा अनुभव रहा।

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