पटना PMCH में परीक्षा के दौरान लगी आग: माइक्रोबायोलॉजी विभाग से उठी लपटें, 5 दमकल गाड़ियां पहुंचीं

पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में सोमवार को अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई।

आग लगने के समय विभाग में दो शिफ्टों में परीक्षा चल रही थी। विभाग से उठती लपटों और धुएं को देखकर छात्र, कर्मचारी और आसपास के दफ्तरों के कर्मी बाहर निकल आए।

दमकल विभाग को सूचना मिलते ही पांच बड़ी फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोग भी अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश करते रहे।

एचओडी बोले- धुआं उठते ही काटी गई बिजली सप्लाई

माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. प्रत्युल नंदन ने बताया कि परीक्षा समाप्त होने वाली थी, तभी विभाग के एक हिस्से से धुआं उठना शुरू हुआ।

स्थिति को देखते हुए सबसे पहले बिजली की सप्लाई काटी गई, लेकिन कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया।

उन्होंने बताया कि आग बुझाने के शुरुआती प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर फायर ब्रिगेड को बुलाया गया।

हादसे में महत्वपूर्ण दस्तावेज, दवाइयां, केमिकल और फर्नीचर जलकर खाक हो गए।

शॉर्ट-सर्किट की आशंका, जांच के आदेश

जिला फायर कमांडेंट रितेश पांडेय के अनुसार कंट्रोल रूम को दोपहर 2:10 बजे आग लगने की सूचना मिली थी।

PMCH परिसर में अग्निशमन व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण पहले से एक फायर टेंडर तैनात था, जबकि सूचना मिलते ही छह अन्य गाड़ियां भी रवाना की गईं।

प्राथमिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट-सर्किट मानी जा रही है। हालांकि मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है।

दो महीने में तीसरी बार आग, बढ़ी चिंता

गौरतलब है कि अप्रैल महीने में भी PMCH के पैथोलॉजी विभाग में आग लगी थी, जिसमें मशीनें, दस्तावेज और अन्य सामान जल गए थे।

उस घटना के पीछे भी शॉर्ट-सर्किट को कारण बताया गया था।

इसके अलावा हाल ही में स्त्री एवं प्रसूति विभाग के पुराने भवन में भी आग लगने की घटना सामने आई थी।

लगातार हो रही अगलगी की घटनाओं ने देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल PMCH की सुरक्षा और अग्निशमन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बार-बार हो रहे हादसों से मरीजों और कर्मचारियों में डर

लगातार आग लगने की घटनाओं से अस्पताल कर्मियों, छात्रों और मरीजों के परिजनों में चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में फायर सेफ्टी ऑडिट, वायरिंग जांच और आपातकालीन सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

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