उत्तराखंड के श्रीनगर पहुंचे सीडीएस अनिल चौहान, गढ़वाल यूनिवर्सिटी की दीं 227 किताबें

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 अनिल चौहान (चीफ आफ डिफेंस स्टाफ) गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर पहुंच गए हैं। उनके आगमन पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया।

सीडीएस ने केंद्रीय पुस्तकालय में भारत, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा साइबर सुरक्षा से जुड़ी कुल 227 महत्वपूर्ण पुस्तकें भेंट कीं। इन पुस्तकों को विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। पुस्तकें राष्ट्रीय सुरक्षा, सामरिक अध्ययन और वैश्विक परिदृश्य जैसे विषयों पर आधारित हैं, जिससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर सीडीएस अपनी पत्नी अनुपमा चौहान के साथ विश्वविद्यालय पहुंचे। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत भी मौजूद रहे।

देश की तीनों सेनाओं के प्रमुख सीडीएस अनिल चौहान हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय और वीर चंद्र सिंह राजकीय आयुरविज्ञान शोध संस्थान के छात्र-छात्राओं से संवाद करेंगे। यह पहला मौका है, जब सीडीएस चिकित्सा शिक्षा के छात्र-छात्राओं से भी बातचीत करेंगे।

पौड़ी गढ़वाल के खिरसू ब्लाक के गवाणा गांव निवासी देश के दूसरे सीडीएस हैं। उनके इस एक दिवसीय दौरे को लेकर स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह है। बता दें कि देश के पहले सीडीएस स्व. बिपिन रावत ने भी वर्ष 2021 में गढ़वाल विवि में छात्र-छात्राओं के साथ संवाद किया था। वह, भी पौड़ी गढ़वाल निवासी थे।
इधर, आज शनिवार को देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी के कार्यक्रम से गढ़वाल विवि और मेडिकल कालेज में उत्साह का माहौल है।

सीडीएस के स्वागत में गढ़वाल की लोक संस्कृति, रीति-रिवाज भी प्रदर्शित हो रहे हैं। विवि के चौरास कैंपस में पारंपरिक वाद्य यंत्रों के सीडीएस अनिल चौहान का स्वागत किया जाएगा। इधर, मेडिकल कालेज में भी कार्यक्रम को लेकर व्यवस्था चाक-चौबंद की जा चुकी है। प्राचार्य डाक्टर आशुतोष सयाना ने बताया कि यह हम सबके लिए नया अनुभव है।

माटी अपने सपूत का करती है सत्कार : कुलपति प्रो श्रीप्रकाश

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमंथन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सीडीएस द्वारा भेंट की गई 227 पुस्तकों का विधिवत विमोचन स्वयं अनिल चौहान ने किया।

उन्होंने कहा कि भारत, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और साइबर सुरक्षा से जुड़ी ये पुस्तकें विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। विशेषकर शोध छात्रों को इन संदर्भ-गर्भित पुस्तकों से व्यापक अकादमिक लाभ मिलेगा। कुलपति ने भावुक शब्दों में कहा, “जब कोई सपूत बेटा अपनी माटी की ओर लौटता है तो माटी भी उसका सत्कार करती है।

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