मानसून से पहले ही हनुमानगढ़ी के समीप राप्ती नदी की कटान देखकर लोगों की चिंता बढ़ गई है।। हार्बर्ट बंधा और नदी के बीच खेती करने वाले किसानों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में नदी ने तेजी से किनारे को काटा है।
मानसून में कमजोर हुई मिट्टी आए दिन भरभराकर नदी में समा रही है। धारा बदलने के कारण पानी के भीतर बहाव तेज है। डोमिनगढ़ से राजघाट तक नदी में घुमाव होने के कारण यह स्थिति बन रही है।
हनुमानगढ़ी मंदिर के आसपास बड़ी आबादी निवास करती है। बहरामपुर, बसंतपुर, हनुमानगढ़ी और खरखरवा के किसान नदी के किनारे खेती करते हैं। कटान के कारण उनकी फसल और खेती की भूमि पर खतरा मंडरा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस उपाय नहीं किए गए तो मानसून में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
हनुमानगढ़ी-बसंतपुर मोहल्ला निवासी राधेश्याम निषाद ने बताया कि वर्तमान स्थिति को देखकर यह आशंका है कि बाढ़ के दौरान अधिकांश खेत बह सकते हैं। अमित कुमार ने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में कटान तेजी से बढ़ी है, जिससे कई किसानों की भूमि नदी में समा चुकी है।


