मंडी में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए हैं। भाजपा ने पिछले चुनाव में विद्रोह कर पार्टी से बाहर गए नेताओं की वापसी पर बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। पार्टी अब संगठन को मजबूत करने और अंदरूनी असंतोष को खत्म करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है।
इसके तहत अनुशासन कमेटी के गठन का निर्णय लिया है, जो आने वाले समय में अहम भूमिका निभा सकती है।
भाजपा में रहकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाले नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने का काम भी इसी कमेटी की सिफारिश से किया जाना है। मंडी में हुई बैठक में पार्टी नेताओं ने इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की है।
चुनाव में विद्रोही पहुंचा चुके हैं नुकसान
विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान विद्रोही तेवर अपनाने वाले नेताओं की गतिविधियों ने पार्टी को काफी नुकसान पहुंचाया था। इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन स्तर पर कई दिनों से मंथन चल रहा था, इसके बाद यह निर्णय लिया है।
कमेटी करेगी समीक्षा
पार्टी द्वारा गठित की जाने वाली अनुशासन कमेटी बागी नेताओं के मामलों की समीक्षा करेगी। यह कमेटी तय करेगी कि किन नेताओं को दोबारा पार्टी में शामिल किया जा सकता है और किन पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
कौन करेगा चुनाव कमेटी का गठन
सूत्र बताते हैं कि बैठक में यह भी तय किया है कि चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनाव कमेटी के गठन का अधिकार प्रदेश अध्यक्ष को दिया जाए। इससे संगठनात्मक निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे और जमीनी स्तर पर तैयारियों को मजबूत किया जा सकेगा।
पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि नेता अभी भी संगठन के विरुद्ध गतिविधियों में शामिल हैं, उन पर नजर रखी जाएगी। यदि उनकी गतिविधियां पार्टी विरोधी पाई जाती हैं तो अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
नाराज नेताओं को भी संगठन के साथ चलाने की तैयारी
भाजपा के कई ऐसे नेता हैं जो पार्टी से औपचारिक रूप से निष्कासित नहीं किए गए हैं, लेकिन वे नाराज चल रहे हैं। हालांकि वे सक्रिय रूप से संगठन के साथ नहीं जुड़े हैं। पार्टी अब ऐसे नेताओं को भी मनाने की कोशिश कर रही है। नेतृत्व का मानना है कि यदि इन नेताओं को वापस जोड़ा जाता है तो आगामी चुनाव में संगठन को मजबूती मिलेगी।


