रतन टाटा के निधन के बाद से देश के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह (Tata Group) में सत्ता और शक्ति संतुलन को लेकर खींचतान चल रही है, और अब खबर है कि टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (N Chandrashekhran) तीसरी बार टाटा संस (Tata Sons) का नेतृत्व करने की पेशकश ठुकरा सकते हैं। द हिंदू की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है। हालांकि, वे टाटा समूह की फ्यूचर ग्रोथ के लिए एक विस्तृत योजना तैयार करेंगे और घाटे में चल रही कंपनियों को मुनाफे में लाने के लिए एक समय सीमा निर्धारित करेंगे।
इस रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ट्रस्टियों के बीच चल रही कई तरह की गतिविधियों और विभाजित राय के कारण एन चंद्रशेखरन के लिए स्थिति असहज हो गई है, जिन्हें विभिन्न गुटों के भीतर सत्ता परिवर्तन के बीच एकमात्र स्थिर विकल्प के तौर पर देखा जाता रहा है। हालांकि, टाटा समूह में एन चंद्रशेखरन का अभी भी सम्मान किया जाता है और उन्हें काफी सराहा जाता है। लेकिन, उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में समूह की कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन की जांच होने से उनका टाटा
घाटे में कंपनियां, चंद्रशेखरन पर बढ़ता दबाव
इससे पहले खबर आई थी कि एन चंद्रशेखरन से उम्मीद की जा रही है कि वे टाटा समूह की ग्रोथ के लिए एक सॉलिड प्लान बनाएं। इसमें सबसे अहम बात यह है कि वे लगातार घाटे में चल रही कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन की समयसीमा सुनिश्चित करें, कि वे कब तक मुनाफा देना शुरू करेंगी।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप की ये कंपनियां:
- एयर इंडिया: 2022 में टाटा समूह के पास वापस आने के बाद से घाटे में
- टाटा डिजिटल
- टाटा प्रोजेक्ट्स
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन नए व्यवसायों में उम्मीद से कहीं ज्यादा घाटा हुआ है, जिससे इनमें लगाए जा रहे भारी-भरकम पैसे पर चिंताएं बढ़ गई हैं।
नोएल टाटा का कड़ा रुख
टाटा ट्रस्ट्स (जिसके पास टाटा संस की लगभग दो-तिहाई हिस्सेदारी है) के चेयरमैन नोएल टाटा अब पूरी तरह से समूह का नियंत्रण अपने हाथ में लेते दिख रहे हैं। फरवरी में हुई एक बोर्ड मीटिंग में एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर मुहर लगनी थी, लेकिन नोएल टाटा के दखल के बाद इसे टाल दिया गया। क्योंकि, नोएल टाटा ने घाटे वाली कंपनियों, उनमें खर्च हो रहे संसाधनों और उन्हें मुनाफे में लाने की समय-सीमा पर कड़े सवाल किए थे। दरअसल, नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन के बीच यह विरोधाभास इसलिए है कि जहां नोएल टाटा वित्तीय अनुशासन और नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं चंद्रशेखरन ग्रोथ और विस्तार पर फोकस कर रहे हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

