छोटी-छोटी बीमारियों में एंटीबायोटिक का अंधाधुंध इस्तेमाल जिले में गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत दे रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण पर अब एंटीबायोटिक बेअसर हो चुकी है, जो तेजी से बढ़ते एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का संकेत है। इसके बावजूद वायरल बुखार और सामान्य संक्रमण में भी भारी दवाइयों का उपयोग, अधूरी डोज और बिना जांच इलाज भविष्य में मामूली बीमारी को भी जानलेवा बना सकता है।
जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों में भी कई मामलों में बिना पूरी जांच के लार्ज स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स लिखे जाने के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को जल्दी ठीक करने के दबाव या मरीजों की मांग के कारण कई बार ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जिनकी जरूरत नहीं होती। अगर सभी जागरूक होंगे तो इन बढ़ती दवाइयां को कम किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात ये है कि इंसान का शरीर भी ठीक रहेगा।
जिले के एक निजी अस्पताल में सर्दी-जुकाम से पीड़ित मरीज को एंटीबायोटिक दी गई, जबकि यह वायरल संक्रमण था। इसी तरह बुखार व हल्की गले की समस्या वाले मरीजों को भी कई बार शक्तिशाली दवाएं लिखी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक का कोई फायदा नहीं होता, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण मरीज स्वयं डाक्टर से इसकी मांग करते हैं।


