बिजली व्यवस्था बिगड़ने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त संदेश, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

भीषण गर्मी में रिकार्ड स्तर पर पहुंची बिजली की मांग के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिए हैं कि गांव हो या शहर, प्रदेश में कहीं भी बिजली संकट की स्थिति नहीं बननी चाहिए।

ऊर्जा विभाग, पावर कारपोरेशन और सभी डिस्काम अधिकारियों के साथ रविवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को निर्बाध तथा गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि शिकायत निस्तारण, ट्रांसफार्मर मरम्मत और फीडर संचालन में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अपने आवास में आयोजित समीक्षा बैठक में कहा कि बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट व मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजना से 3,742 मेगावाट बिजली प्राप्त हो रही है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में गैर पारंपरिक ऊर्जा विकल्पों से लगभग दस हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।

ट्रांसमिशन नेटवर्क की मजबूती पर विशेष जोर

ऊर्जा व्यवस्था को और भरोसेमंद बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने ट्रांसमिशन नेटवर्क की मजबूती पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि गर्मी और आंधी-तूफान जैसी परिस्थितियों में भी बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए त्वरित रिस्पांस सिस्टम चौबीसों घंटे सक्रिय रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फील्ड स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और फीडरवार मानिटरिंग से यह सुनिश्चित किया जाए कि शिकायतों का तत्काल समाधान हो।

ट्रांसफार्मर क्षति में आई कमी

मुख्यमंत्री ने ट्रांसफार्मर क्षति में आई कमी को सकारात्मक उपलब्धि बताते हुए इसे और बेहतर करने के निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2022-23 में जहां 429 पावर ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 87 रह गई है। बड़े वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षति दर में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। प्रदेश में बिजली मांग लगातार नए रिकार्ड बना रही है। बैठक में बताया गया कि भीषण गर्मी में पीक डिमांड 30,339 मेगावाट तक दर्ज की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बढ़ती मांग के अनुरूप सभी संभावित स्रोतों से बिजली खरीद और आपूर्ति प्रबंधन सुनिश्चित की जाए।

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2029 तक अतिरिक्त 10,719 मेगावाट क्षमता जोड़ने की तैयारी चल रही है, जिसमें विंड एनर्जी, बैटरी स्टोरेज, पंप हाइड्रो और हाइब्रिड परियोजनाएं शामिल हैं।

हेल्पलाइन और स्मार्ट मीटर सिस्टम की भी समीक्षा

उपभोक्ता सेवाओं को तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन व्यवस्था और स्मार्ट मीटर सिस्टम की भी समीक्षा की। 1912 काल सेंटर व्यवस्था के तहत अब प्रतिदिन 90 हजार काल संभालने की क्षमता विकसित की गई है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को काल सेंटर का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को यह भी बताया जाए कि समस्या कब तक दूर होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आपूर्ति केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि किसानों की सिंचाई, उद्योगों की उत्पादन क्षमता, व्यापारिक गतिविधियों और आम नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है, इसलिए हर स्तर पर सतर्कता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य किया जाए ताकि भीषण गर्मी में प्रदेशवासियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर हुए पोस्टपेड

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कुल लगे 89.23 लाख स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड में बदल दिया गया है। जून से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को हर माह एक से 10 तारीख के बीच बिल उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बिलिंग और कलेक्शन को और बेहतर बनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।

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