उत्तराखंड की बेटियों ने जल विद्युत उत्पादन में रचा इतिहास, 247 महिलाएं उठा रहीं जोखिम

 हर मोर्चे पर अपने कौशल का लोहा मनवा चुकी बेटियां अब पानी से बिजली बनाने के जोखिम भरे काम में भी नई पहचान गढ़ रही हैं।

जल विद्युत उत्पादन केंद्रों में नदियों की गरजती धाराओं के बीच, जब टर्बाइन पूरी ताकत से घूमते हैं और एक छोटी चूक भी बड़ा खतरा बन सकती है, वहीं उत्तराखंड की महिलाएं पूरे आत्मविश्वास के साथ बिजली उत्पादन का कार्य संभाल रही हैं। उत्तराखंड के जल विद्युत उत्पादन केंद्रों में 247 महिलाएं ऊर्जा उत्पादन के कठिन मोर्चे पर डटी हैं।

धरासू विद्युत उत्पादन केंद्र में कार्यरत कमल राणा बताती हैं कि तेज बहाव के दबाव में टर्बाइन चलाना, हाई वोल्टेज लाइनों के बीच काम करना व मशीन में खराबी आते ही उसे ठीक करने के जोखिम भरे काम वे नियमित करती हैं। वह कहती हैं, हम रोज टेस्टिंग करते हैं और नई तकनीक के साथ खुद को अपडेट रखते हुए हर दिन कुछ नया सीखते हैं।

ट्रांसफार्मर की निगरानी से लेकर सभालतीं सुरक्षा सिस्टम

धरासू में ही कार्यरत दीक्षा चौहान मशीनों की जांच, सुरक्षा सिस्टम संभालने और खराबी पकड़ने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उनके अनुसार, स्विच यार्ड में नई तकनीक, आधुनिक रिले सिस्टम, ट्रांसफार्मर की निगरानी और बिजली के लोड को संभालना बेहद सावधानी वाला काम है।

कमल राणा कहती हैं कि पावर हाउस में काम जोखिम भरा जरूर है, लेकिन सुरक्षा व प्रशिक्षण के कारण वे इसे आत्मविश्वास से करती हैं। रात में फाल्ट होने पर भी वे टीम के साथ मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान करती हैं।

चीला जल विद्युत उत्पादन केंद्र की मीनाक्षी बसेड़ा टर्बाइन संचालन, जनरेटर को जोड़ने और स्विच यार्ड संभालने का काम देख रही हैं, जबकि खटीमा पावर हाउस की मोना उप्रेती हाई वोल्टेज लाइनों की निगरानी और बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

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