ईरान ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को साढ़े सात की सजा सुनाई है। इसके बाद एक बार फिर उनकी चर्चा हो रही है। ईरानी सरकार और नरगिस मोहम्मदी के बीच पिछले कई दशकों से संघर्ष चला आ रहा है।
उनके वकील का कहना है कि इस सजा ने ईरानी अधिकारियों के साथ दशकों से चल रही उनकी लड़ाई को और आगे बढ़ा दिया। तो आइए जानते हैं कि…
कौन हैं नरगिस मोहम्मदी?
- 53 साल की नरगिस मोहम्मदी एक जानी-मानी ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं, जो ईरान में महिलाओं पर होने वाले अत्याचार और राजनीतिक दमन के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जानी जाती हैं।
- ईरानी अधिकारी उन पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने और राज्य के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप लगाते हैं। वहीं वह और उनके समर्थक इन आरोपों से इनकार करते हैं और कहते हैं कि उन्हें शांतिपूर्ण एक्टिविज्म के लिए सजा दी जा रही है।
- नरगिस एक इंजीनियर और लेखिका के साथ-साथ मानवाधिकार रक्षक केंद्र (डीएचआरसी) की उपाध्यक्ष भी हैं। डीएचआरसी की स्थापना नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी ने की थी। उन्होंने बीते एक दशक का ज्यादातर समय जेल में बिताया है।
- नरगिस फाउंडेशन का कहना है कि इस नए फैसले के बाद उनके खिलाफ कुल जेल की सजा 44 साल हो गई है। 2021 से वह राष्ट्रीय सुरक्षा के आरोपों में 13 साल की सजा काट रही हैं।
- उन्हें 2023 में ईरान में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ लड़ाई और सभी के लिए मानवाधिकार और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया। जब वह तेहरान जेल में बंद थीं, तब उनके बच्चों ने ये पुरस्कार लिया था।
अब क्यों मिली साढ़े सात साल की सजा
नरगिस मोहम्मदी को 12 दिसंबर, 2025 को मशहद में मानवाधिकार वकील खोसरो अलीकोर्डी के लिए आयोजित की गई शोक सभा से गिरफ्तार किया गया था। उनके ऊपर भड़काऊ बयानबाजी, नियम तोड़ने वाले नारे और शांति भंग करने के आरोप लगाए गए। उन्हें 13 बार गिरफ्तार किया जा चुका है और 5 बार दोषी ठहराया जा चुका है।


