परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार सरहद के बाद अब समाज की बुराइयों से लड़ेंगे, रिटायर होने के बाद अगले मिशन पर

फौजी कभी रिटायर नहीं होता, बस उसकी ड्यूटी बदल जाती है। अब सामाजिक जागरुकता को लेकर लड़ाई लड़ूंगा। यह बात कारगिल युद्ध के हीरो महानायक व परमवीर चक्र विजेता आनररी कैप्टन संजय कुमार ने कही।

कैप्टन संजय कुमार 29 साल आठ माह तक देश की सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त हो गए हैं। इस उपलक्ष्य पर रविवार को बिलासपुर के झंडूता स्थित उनके पैतृक गांव बकैन में कार्यक्रम हुआ।

नशे के खिलाफ छेड़ेंगे जंग

इस दौरान कैप्टन संजय कुमार ने कहा कि अब वे अपने जिले में आकर सामाजिक बुराइयों एवं नशे के खिलाफ जंग शुरू करेंगे। कार्यक्रम में विधायक जीतराम कटवाल ने पहुंचकर उन्हें न केवल बधाई दी, बल्कि इतने लंबे समय तक देश की सेवा करने के लिए धन्यवाद किया। साथ ही उनसे आह्वान किया कि वे युवाओं को देशसेवा व अच्छे कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें।

..यह भावुक और गौरवांवित पल

जीतराम कटवाल ने कहा कि कोटधार के बकैण गांव के रहने वाले संजय कुमार देश की शान हैं। उनकी सेवानिवृत्ति भावुक करने वाले क्षण के साथ-साथ गौरवांवित होने वाला पल भी है। भावुकता की वजह यह है कि एक महान सैनिक सक्रिय सेवा से विदा ले रहा है, जबकि गौरवांवित होने का कारण यह है कि अब वह अपने अनुभव, अनुशासन और प्रेरणा से आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेंगे। संजय कुमार ने यह साबित किया है कि कोई क्षेत्र चाहे कितना भी पिछड़ा हो, यदि संकल्प मजबूत हो तो उसी मिट्टी से देश के महानायक जन्म लेते हैं।

कारगिल में नेस्तनाबू कर दिए थे दुश्मन के बंकर

तीन मार्च 1976 को जन्मे संजय कुमार ने सेना के भर्ती होने के बाद चार जुलाई 1999 को कारगिल में 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के राइफलमैन के रूप में दुश्मन के दांत खट्टे किए। संजय कुमार को सेना ने सर्वोच्च सम्मान दिया है। इस सपूत ने गोलियों से छलनी होने के बाद भी दुश्मन के बंकरों को नेस्तनाबूद कर दिया था।

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