अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फ़िलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास समेत 80 अन्य अधिकारियों के वीज़ा रद्द कर दिए। यह कदम संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक से पहले उठाया गया, जिसे फिलिस्तीन के प्रतिनिधियों ने बड़ी बैठक में शामिल होकर हिस्सा ले रखा था।
क्या कहा अमेरिकी विदेश विभाग ने?
विदेश विभाग ने अपने बयान में कहा कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के मद्देनजर उठाया गया है। इसका उद्देश्य प्लेस्टिनियन अथॉरिटी (PA) और प्लेस्टाइन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) को उनके शांति प्रयासों में कमी और आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोपों के लिए जवाबदेह बनाना है।
संक्षेप में, अमेरिका चाहता है कि PA और PLO:
- आतंकवाद का लगातार निंदनीय समर्थन करें,
- शिक्षा में आतंकवाद को बढ़ावा न दें (जैसा PLO ने वादा किया था)।
क्या हुआ अब्बास और अन्य प्रतिनिधियों को?
अब्बास समेत कई अधिकारियों के वीज़ा रद्द हो गए, लेकिन UN के न्यूयॉर्क मिशन पर काम करने वाले प्रतिनिधियों को विशेष छूट (waiver) दी गई है, ताकि वे अपने काम जारी रख सकें। यह पहला मौका माना जा रहा है जब अमेरिका ने किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल को इतनी बड़ी संख्या में वीज़ा से वंचित किया है।
किसने क्या प्रतिक्रिया दी?
फ़िलिस्तीन प्राधिकरण (PA) ने इस निर्णय को अंतर्राष्ट्रीय कानून और UN मुख्यालय समझौते का उल्लंघन बताया। उन्होंने अमेरिका से इस फैसले को पलटने का अनुरोध किया। UN के प्रवक्ता स्टीफ़ेन डुजारिक ने कहा कि वे अमेरिका से इस फैसले पर स्पष्टीकरण चाहेंगे, क्योंकि सभी सदस्य और स्थायी पर्यवेक्षक देश की प्रतिनिधित्व की बाध्यता बनी रहनी चाहिए।
इसका असर:
यह कदम उस समय आया जब कई पश्चिमी देशों—जैसे फ़्रांस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया—UNGA में फिलिस्तीन की राज्यता को मान्यता देने पर विचार कर रहे हैं। साथ ही, अमेरिका ने लगभग $5 अरब सहायता, जिसमें यूएन और पीसकीपिंग मिशन शामिल हैं, को भी रोकने की घोषणा की। यह कूटनीतिक शिकंजा एक गहरे प्रभाव की ओर इशारा करता है: जहां एक तरफ अमेरिका इस कदम से इराक-फ़िलिस्तीन मुद्दों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर दुनिया के कई हिस्सों में फिलिस्तीन को वृद्धि प्राप्त कराते समर्थन का इशारा भी बढ़ा रहा है।