सिंगरौली।जिले में कुछ समय से एक पार्षद पति हमेशा सुर्खियों में बने किए हैं कभी ये जमीन विवाद में सुर्खियों बटोरते हैं तो कभी निगम के अधिकारी के टेबल पर भी सुर्खियों में बने रहते हैं। खैर, इनको स्टार बनाने का कोई वजह तो नहीं, मगर ये सोचना पड़ रहा है कि क्या आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी इतने पढ़े लिखे अधिकारियों के बीच पार्षद पति के पद को वैध करार देना सही है? क्या कारण है कि नियम के विरुद्ध सभी मीटिंग, निर्णयों में अधिकारी इस नियम विरुद्ध पद को मान्यता दे रहे हैं। आलम ये है कि अब जितने मामले प्रकाश में आ रहे है सभी पार्षद पति के ही क्यों आ रहे है? ये समझ पाना थोड़ा मुश्किल है।
एक बड़े ही फेमस वेब सीरीज अभी हाल में ही आयी थी जो अमेजन प्राइम वीडियो पर आप जब चाहे देख सकते हैं उसका नाम है “पंचायत” इसमें भी प्रतिनिधि पति पर विशेष प्रकाश मेकर ने डाला है वेब सीरीज में बतौर कलेक्टर का किरदार निभाने वाली मैडम ने तो प्रतिनिधि पति सहित सचिव की जमकर क्लास लगाई है। मगर इस बेब सीरीज से भी निगम के अधिकारी सहित जिम्मेदार अधिकारियों को सीख लेने की आवश्यकता है। आपको बता दें कि इस तरह का कोई पद होता ही नहीं है। ये तो प्रतिनिधियों के पति खुद ही अपना पद बना लिया करते है। और सोचने वाली बात है कि पढ़े लिखे अधिकारी भी जानते हुए भी अंजान बनकर ऐसे पद को वैध करार दे देते हैं।