संजय 200 करोड़ के मालिक, 140 करोड़ रिकवरी का डर; 4 दिग्गजों की कैसी है स्थिति?

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‘बीजेपी में कंफर्टेबल हैं या नहीं?’ जब यह सवाल ढाई साल पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना से पूछा गया, तो उनका जवाब था, ‘मैं संतुष्ट हूं।’

वहीं, बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में गए पूर्व मंत्री दीपक जोशी इसी सवाल पर दर्द बयां करते हैं, ‘मैं तो अब किसी भी पार्टी में नहीं हूं। न कांग्रेस मुझे बैठकों में बुलाती है और न ही बीजेपी मुझे अपना मानती है। मैं तटस्थ होकर ही खुश हूं।’

मध्य प्रदेश में 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी और कांग्रेस के कई दिग्गजों ने पाला बदला था।

अब जब कांग्रेस ने ‘घर वापसी’ अभियान शुरू किया है और बीजेपी में गए 600 से ज्यादा नेताओं की वापसी के आवेदन का दावा किया है, तब पाला बदलने वाली यह सियासत फिर चर्चा में है।

भोपाल के 74 बंगले इलाके में स्थित पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बंगले पर कभी बीजेपी कार्यकर्ताओं का जमावड़ा रहता था, लेकिन आज वहां सन्नाटा पसरा है। उनके बेटे और पूर्व मंत्री दीपक जोशी तीन दशक तक बीजेपी में रहने के बाद मई 2023 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

पार्टी क्यों छोड़ी?

पिता कैलाश जोशी के स्मारक के लिए बीजेपी सरकार की तरफ से जमीन न देना और कोरोना काल में पत्नी के निधन के दौरान इलाज में सरकारी मदद न मिलना। इसके उलट, कमलनाथ ने स्मारक के लिए जमीन आवंटित की थी।

कांग्रेस और बीजेपी में अब क्या है स्थिति?

कांग्रेस ने उन्हें खातेगांव से टिकट दिया, लेकिन वे चुनाव हार गए। जोशी कहते हैं कि हार के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक कांग्रेस ने बैठकों में बुलाया, फिर पूछना बंद कर दिया।

इस बीच शिवराज सिंह चौहान ने अनौपचारिक रूप से उनकी बीजेपी में वापसी का ऐलान किया, लेकिन तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने पार्टी नियमों का हवाला देकर रोक लगा दी। नतीजा ये हुआ कि दीपक जोशी आज न तो बीजेपी में है और न ही कांग्रेस में।

छिंदवाड़ा में साल 1980 से कमलनाथ के सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार रहे दीपक सक्सेना को कभी छिंदवाड़ा का ‘कमलनाथ’ कहा जाता था।

दिग्विजय सरकार में मंत्री रहे सक्सेना 7 बार विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं। छिंदवाड़ा में रोहना स्थित उनके बंगले पर त्योहारों पर मेले जैसा माहौल रहता था।

पार्टी क्यों छोड़ी?

2018 में नकुलनाथ के आने के बाद उपेक्षा का एहसास और बेटे अजय सक्सेना का बीजेपी में शामिल होना। पिता-पुत्र के अलग-अलग दलों में रहने की स्थिति से बचने के लिए उन्होंने 48 साल पुराना साथ तोड़ दिया।

21 मार्च 2024 को उन्होंने कांग्रेस छोड़ी और 5 अप्रैल 2024 को बीजेपी में शामिल हो गए।

बीजेपी में अब क्या है स्थिति?

दीपक सक्सेना को निगम-मंडल में पद मिलने की चर्चाएं थीं, लेकिन लंबे समय बाद भी उन्हें संगठन या सरकार में कोई पद नहीं मिला है, हालांकि उनका बेटा अजय सक्सेना बीजेपी का जिला उपाध्यक्ष है।

जो दीपक सक्सेना कभी अपने रोहना बंगले पर नेताओं का दरबार लगाते थे, वे पिछली दिवाली पर बीजेपी नेताओं के घर मिठाई के डिब्बे लेकर पहुंचे।

इंदौर-1 से पूर्व कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला मार्च 2024 में बीजेपी में आए थे। 200 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति वाले शुक्ला कांग्रेस के बड़े आर्थिक मददगार माने जाते थे।

पार्टी क्यों छोड़ी?

राम मंदिर का न्योता ठुकराने का विरोध और कैलाश विजयवर्गीय से चुनाव हारने के बाद कांग्रेस में भविष्य न दिखना, लेकिन अंदरूनी कहानी यह थी कि सीएम बदलने के बाद उन पर पुराने अवैध खनन केस में 140 करोड़ रुपए (उनकी कुल संपत्ति का करीब 65%) की रिकवरी की फाइल खुलने का अनौपचारिक मैसेज पहुंच गया था।

अब क्या है स्थिति?

बीजेपी में उनके पास फिलहाल कोई पद नहीं है और न ही टिकट का कोई आश्वासन है।

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