झारखंड में 1200 सरकारी डॉक्टरों का बड़ा ऐलान, 22 अक्टूबर से काम बंद; सरकार के सामने रखीं ये मांगें

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 सरकारी चिकित्सकों से जुड़े सेवा मामलों को लेकर झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (झासा) ने आंदोलन का निर्णय लिया है। रविवार को आईएमए भवन में हुई संघ की जनरल बाडी मीटिंग में राज्य के विभिन्न जिलों से 120 से अधिक चिकित्सक शामिल हुए।

बैठक में डायनेमिक एसीपी, नियमित नियुक्ति, संविदा नियुक्ति नियमावली और सेवानिवृत्ति आयु सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। चिकित्सकों ने केंद्र और बिहार की व्यवस्था के अनुरूप सेवा लाभ देने की मांग की।

संघ ने स्पष्ट किया कि मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 5 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके बाद 22 अक्टूबर से राज्य के करीब 1200 सरकारी डॉक्टर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार करेंगे। इसका सीधा असर सदर अस्पताल सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों पर पड़ेगा।

झासा सचिव डॉ. मृत्युंजय ठाकुर ने बताया कि आंदोलन से पहले अपर मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर चिकित्सकों की मांगों से अवगत कराया जाएगा। इसके लिए सरकार को बातचीत और समाधान का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मांगें नहीं मानी गई तो तय कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन आगे बढ़ेगा। संघ ने आंदोलन की स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी विभाग पर होने की बात कही।

20 साल में चार एसीपी की मांग :

बैठक में डॉ. अजित कुमार ने डायनेमिक एसीपी का मुद्दा प्रमुखता से उठा। झासा के अनुसार, वर्ष 2015 में विशेषज्ञ चिकित्सक संवर्ग का गठन किया गया था, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए डायनेमिक एसीपी की स्पष्ट व्यवस्था अब तक नहीं बन सकी है।

संघ केंद्र और बिहार की तर्ज पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए डायनेमिक एसीपी चाहता है। वहीं एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए नए फार्मूले से 20 वर्षों में चार डायनेमिक एसीपी देने की मांग रखी गई। संघ ने दंत चिकित्सकों की सेवा व्यवस्था का भी हवाला दिया। झासा के अनुसार, झारखंड में दंत चिकित्सकों को तीन डायनेमिक एसीपी मिलते हैं, जबकि केंद्र और बिहार में चार एसीपी की व्यवस्था है।

रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति की मांग :

झासा अध्यक्ष डॉ. विमलेश सिंह ने सरकारी चिकित्सकों के रिक्त पदों पर नियमित बहाली की मांग उठाई। संघ के अनुसार, जेपीएससी के माध्यम से भरे जाने वाले चिकित्सकों के 1422 पद अभी रिक्त हैं। इन पदों को भरने के लिए नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग की गई।

संघ का कहना है कि चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए पहले राज्य में स्वीकृत पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए। संविदा चिकित्सक नियुक्ति नियमावली को लेकर भी संघ ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। चिकित्सकों का कहना है कि राज्य के योग्य चिकित्सकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के बाद ही दूसरे राज्यों से संविदा पर चिकित्सकों को लाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

67 से 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति का विरोध :

सरकारी चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु 67 से घटाकर 65 वर्ष किए जाने के निर्णय पर भी झासा ने विरोध जताया। संघ ने कहा कि चिकित्सकों की सेवा शर्तों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों से पहले संबंधित संगठन के प्रतिनिधियों से चर्चा होनी चाहिए। बैठक में चिकित्सकों ने सेवा लाभ और पदोन्नति से जुड़े मामलों के समयबद्ध समाधान की भी मांग रखी।

झासा के डॉ. अजित कुमार ने कहा कि सरकार चिकित्सकों की कमी की बात करती है, जबकि राज्य में बड़ी संख्या में स्वीकृत पद रिक्त हैं। ऐसे में पहले रिक्त पदों पर नियुक्ति और मौजूदा चिकित्सकों से जुड़े लंबित सेवा मामलों का समाधान जरूरी है।

नेतृत्व पर कार्रवाई हुई तो कड़ा रुख :

बैठक में संघ के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों को लेकर भी प्रस्ताव पारित किया गया। झासा ने कहा कि संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ बिना स्पष्ट आरोप या उचित आधार के स्थानांतरण अथवा कार्रवाई की गई तो संघ कड़ा निर्णय ले सकता है। ऐसी स्थिति में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को ठप करने तक का फैसला लेने की चेतावनी दी गई।

बैठक में झासा के अध्यक्ष डॉ. विमलेश सिंह, सचिव डॉ. मृत्युंजय ठाकुर, संयोजक डॉ. शरद कुमार, डॉ. पीपी शाह, डॉ. स्टीफन खेस, डॉ. मोहन पासवान, डॉ. खालिद अहमद, डॉ. चमन भारद्वाज, डॉ. संजय कुजूर, डॉ. आशुतोष तिग्गा, डॉ. बालकृष्ण महतो, डॉ. सब्यसाची मंडल, डॉ. अनुपम किशोर, डॉ. एस. बास्की, डॉ. सुजीत कश्यप, डॉ. प्रीतेश, डॉ. अखिलेश झा, डॉ. आरके सिंह, डॉ. रंजू, डॉ. रश्मि प्रसाद, डॉ. अजित कुमार, डॉ. विकास, डॉ. रोहित, डॉ. मुकेश, डॉ. कृष्ण मुरारी सिंह, डॉ. रोहित सिंह, डॉ. रवि, डॉ. विवेक विद्यार्थी समेत विभिन्न जिलों से आए चिकित्सक मौजूद थे।

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