बिहार में रफ्तार का नया एक्सप्रेसवे, 2,424km बनेगा हाइवे:120 की रफ्तार से दौड़ेगी कारें, 8 घंटे मे पहुंचेंगे दिल्ली; 1.64 लाख करोड़ खर्च

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बिहार सरकार और NHAI की परियोजनाओं को मिलाकर 2,424 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण परियोजनाओं को इस साल केन्द्र सरकार ने मंजूरी दी है। इस पर 1,64,518 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

राष्ट्रीय राजमार्ग व पथ निर्माण विभाग बिहार से जुड़ी 18 परियोजनाएं हैं। इनकी लंबाई 739 किलोमीटर हैं। इन्हें तैयार करने में 24,940 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

दूसरी ओर NHAI की 14 परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। इनकी कुल लंबाई लगभग 1,685 किलोमीटर और अनुमानित लागत 1,39,578 करोड़ रुपए है।

NHAI के एक्सप्रेसवे से बिहार को मिलेगी तरक्की की रफ्तार

NHAI की परियोजनाओं में गोरखपुर-किशनगंज-सिलीगुड़ी, रक्सौल-हल्दिया, बक्सर-भागलपुर, मुजफ्फरपुर- बरौनी, छपरा-रेवाघाट- मुजफ्फरपुर और पटना नॉदर्न रिंग रोड शामिल हैं।

NHAI के एक्सप्रेसवे पर कारें 120km/h की रफ्तार से दौड़ेंगी। दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों तक जाना और वहां से आना आसान होगा।

1- गोरखपुर-किशनगंज-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे, 5 घंटे में गोपालगंज से जाएंगे बंगाल

526 km लंबे इस एक्सप्रेसवे को तैयार करने में 37,565 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। एक्सप्रेसवे से बिहार के 8 जिलों (पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज) को सीधा फायदा होगा।

इस एक्सप्रेसवे से उत्तर बंगाल, सीमांचल और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा। शिवहर जैसे बिहार के सबसे पिछड़े जिले को काफी फायदा होगा।

एक्सप्रेसवे को जहां तक संभव हो सीधा बनाया जा रहा है। इसपर गाड़ियां 120km/h की रफ्तार से दौड़ पाएंगी। एक्सप्रेसवे पर आने और जाने के लिए तय रास्ते होंगे। एक्सेस कंट्रोल व्यवस्था हादसों को रोकेगी।

5 घंटे में गोपालगंज से सिलीगुड़ी जाएंगे

अभी गोरखपुर से सिलीगुड़ी जाने में 14 से 15 घंटे लगते हैं। एक्सप्रेसवे बन जाने से यह दूरी लगभग 8 घंटे की रह जाएगी। 5 घंटे में गोपालगंज से सिलीगुड़ी पहुंच सकेंगे। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस वे होते हुए कम समय में दिल्ली जा सकेंगे। असम, मेघालय और सिक्किम जैसे नॉर्थ इस्ट के राज्यों में आना-जाना आसान होगा।

अगर आप गोपालगंज के हैं तो एक्सप्रेसवे से सिर्फ 5 घंटे में सिलीगुड़ी पहुंच सकते हैं। अभी सड़क मार्ग से गोपालगंज से सिलीगुड़ी की दूरी करीब 512 किलोमीटर है। एक्सप्रेसवे बन जाने से यह घटकर 435 km रह जाएगी। एक्सप्रेसवे से दिल्ली जाना भी आसान होगा। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे पकड़कर कम वक्त में दिल्ली जा सकेंगे।

सामान ढोने की लागत कम होगी। दूध, फल, सब्जी जैसी जल्द खराब होने वाली खाद्य सामग्रियों को भी दूसरे राज्यों में भेजा जा सकेगा। यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों के बीच माल ढुलाई में सहूलियत होगी।

2- रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे, बिहार से निर्यात होगा आसान

600 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेसवे को बनाने में 40 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। 6 लेन वाले इस एक्सप्रेसवे से बिहार से मखाना, लीची और दूसरे प्रोडक्ट निर्यात करने में आसानी होगी।

एक्सेस-कंट्रोल वाले 6 लेन के एक्सप्रेसवे को 120 km/h की रफ्तार से गाड़ियों के चलने लायक बनाया जा रहा है। इससे बिहार से नेपाल जाने में सुविधा होगी। बिहार के सामान को झारखंड के रास्ते हल्दिया बंदरगाह तक ले जाना आसान होगा। बिहार को बंंदरगाह तक तेज और आसान पहुंच मिलेगी।

इस एक्सप्रेसवे के लिए एक पैकेज में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही तो दूसरे पैकेज में काम प्रगति पर है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पूर्वी चंपारण से कोलकाता जाने में समय आधा लगेगा। अभी रक्सौल से हल्दिया जाने में 20 घंटे लग रहे हैं। सड़क बन जाने के बाद यह दूरी 11 घंटे में तय की जा सकेगी।

336 km लंबे इस ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेसवे को बनाने में 3700 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सिक्स लेन के एक्सप्रेसवे से बक्सर से भागलपुर जाने में 4 से 5 घंटे लगेंगे। अभी 8 घंटे लगते हैं। इस एक्सप्रेसवे से 13 जिलों (बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गयाजी, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर) के लोगों को सीधा फायदा होगा।

खास बात यह है कि बक्सर में यह यूपी के पूर्वांचल एक्सप्रेस से जुड़ेगा। एक्सेस कंट्रोल वाले इस एक्सप्रेसवे पर कारें 120 km/h की रफ्तार से दौड़ेगी। न कट होगा न यू टर्न। तय इंटरचेंज से ही चढ़ना और उतरना होगा।

इसे मोकामा-मिर्जाचौकी एनएच 33- ग्रीनफिल्ड फोरलेन, सुल्तानगंज-अगुवानी फोरलेन अप्रोच रोड, मुंगेर-सबौर गंगा पथ और एनएच-80 से जोड़ने की योजना है।

इस सड़क से भागलपुर से दिल्ली 15 घंटे में जा सकेंगे, जिसकी दूरी 1267 किमी है। अभी 20 घंटे से ज्यादा लगते हैं। इससे भागलपुर के सिल्क, मुंगेर के रेल व सिगरेट उद्योग, गयाजी के टेक्सटाइल और बक्सर-भोजपुर के कृषि उत्पादों को बड़े बाजार मिलेंगे।

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