गुजरात में अब सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों को बिना अनुमति एंट्री नहीं मिलेगी। सरकार ने इसके लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार ने स्कूलों में प्रवेश को लेकर पूरी गाइडलाइन जारी की है।
नए नियम के तहत किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य/संस्था प्रमुख की लिखित अनुमति लेनी होगी। नियमों के उल्लंघन पर पॉक्सो के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
इतना ही नहीं, प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना स्टूडेंट्स, टीचर्स या स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी या लाइव स्ट्रीमिंग भी नहीं की जा सकेगी।
राज्य सरकार ने यह फैसला क्यों लिया, इसकी जानकारी नहीं दी है। लेकिन, माना जा रहा है कि सीजेपी के स्कूल अभियान के चलते यह कदम उठाया गया है। इस मामले पर अब राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है।
शिक्षा मंत्री ने कहा- प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं
शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा ने साफ किया कि नोटिफिकेशन में किसी को भी स्कूल में प्रवेश लेने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। बस उन्हें प्रिंसिपल या स्कूल प्रमुख की अनुमति लेनी होगी।
यह परिपत्र बच्चों की प्राइवेसी बनाए रखने, उनके वीडियो रिकॉर्ड होने और मीडिया में प्रसारित होने की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया है। साथ ही इससे स्कूल में बच्चों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण भी मिल सकेगा।
किशोर न्याय अधिनियम, बीएनएस और अन्य कानूनों के तहत, केवल कानून का उल्लंघन करने पर ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्कूल में प्रवेश करने पर जुर्माना लगाने का कोई प्रावधान नहीं है।
AAP नेता ने कहा- बीजेपी ने सरकारी स्कूल बर्बाद कर दिए
गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता इसुदान गढ़वी ने कहा कि पिछले 30 सालों में बीजेपी ने गुजरात के सरकारी स्कूल बर्बाद कर दिए हैं। दूसरी तरफ बीजेपी नेता अपने निजी स्कूल खोलते जा रहे हैं, जिनका स्वागत किया जा रहा है।
दिल्ली का उदाहरण देते हुए गढ़वी ने कहा- अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों की हालत दुनिया के सामने पेश की, जबकि गुजरात में बीजेपी सरकार इस कानून के जरिए स्कूलों की हकीकत छिपाने की कोशिश कर रही है।
सरकारी स्कूलों की सच्चाई को उजागर होने से रोकने के लिए पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।
बार काउंसिल के जकी शेख ने कहा- पॉक्सो के तहत कार्रवाई गलत
गुजरात बार काउंसिल के सदस्य अधिवक्ता जकी शेख ने कहा कि नोटिफिकेशन के कॉलम नंबर-9 के अनुसार, ऐसे मामलों में पॉक्सो अधिनियम या किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई करना गलत है। इसके लिए स्कूलों में अवैध प्रवेश की धारा लागू होनी चाहिए।
यदि किसी बच्चे के साथ छेड़छाड़ या कोई अन्य घटना होती है, तो केवल उसी स्थिति में पॉक्सो एक्ट का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए। क्योंकि, पॉक्सो अधिनियम के दुरुपयोग के मामले बढ़ रहे हैं।
स्कूलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्कूलों की तरह पैरेंट्स को उनके बच्चों के स्कूलों तक सीधी एंट्री देने पर विचार करना चाहिए
कांग्रेस नेता ने कहा- नाकामी छिपाने की कोशिश
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता डॉ. मनीष दोषी ने कहा कि गुजरात शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल में प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए जारी किया गया सर्कुलर शिक्षा विभाग की विफलता छिपाने की कोशिश है।
राज्य में 3,000 ऐसे स्कूल हैं, जहां सिर्फ एक टीचर है। सरकार वहां शिक्षकों की नियुक्ति क्यों नहीं करती। गुजरात में 14,562 ऐसे स्कूल हैं, जहां एक से अधिक कक्षा के छात्रों को एक ही कक्षा में पढ़ने के लिए मजबूर हैं, सरकार इस मुद्दे पर कार्रवाई क्यों नहीं करती।
वहीं, नेताओं के प्राइवेट स्कूलों के लिए रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है। सरकार की नीति और उसके इरादे दोनों ही गलत हैं। इसीलिए गुजरात एजुकेशन में पिछड़ रहा है। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए जारी किए ऐसे बेतुके नोटिफिकेशन को तुरंत वापस ले।
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विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

