आईटीसी मिशन सुनहरा कल कार्यक्रम की शुरुआत गई है। इसका उद्देश्य मखाना की वैज्ञानिक खेती, आधुनिक प्रसंस्करण और बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करके मखाना उत्पादकों की आय बढ़ाने में मदद करना है।
दरभंगा, मधुबनी, और कटिहार जैसे जिलों में इसके तहत 2,500 से अधिक किसान और कई महिला-संचालित किसान उत्पादक संगठन जुड़े हुए हैं। मिशन सुनहरा कल के तहत किसानों को खेतों की तैयारी, बीज उपचार और सही जल प्रबंधन के आधुनिक वैज्ञानिक तरीके सिखाया जा रहा है।
आधुनिक मशीनें हो रही किसानों को उपलब्ध
पारंपरिक रूप से मखाना फोड़ने में बहुत श्रम लगता था। आइटीसी मखाना फोड़ने और प्रोसेस करने वाली आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने में किसानों की मदद कर रही है। किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए उन्हें सीधे बड़े बाजारों ओर ई कामर्स प्लेटफार्म से जोड़ रही है।
किसानों को उन्नत किस्मों जैसे स्वर्ण वैदेही की खेती, तालाब की तैयारी और जैविक खाद के प्रयोग का प्रशिक्षण दिया जाता है। किसानों को राष्ट्रीय मखाना महोत्सव जैसे आयोजनों से जोड़ती है, ताकि उन्हें सीधा बाजार और उचित मूल्य मिल सके।
महाजनों पर निर्भरता कम होगी
दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के साथ मिलकर आईटीसी विभिन्न गांवों में मखाना किसान समूहों को तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण का प्रशिक्षण देने में जुटी है। इससे किसानों की महाजनों पर निर्भरता कम होगी और वे सीधे मूल्य-संवर्धित उत्पाद तैयार कर अधिक मुनाफा कमाएंगे।
मब्बी गांव के किसान राकेश कुमार का कहना है कि पहले हम परंपरागत तरीके से मखाना उगाते थे। जिसमें लागत ज्यादा और मुनाफा कम होता था। आइटीसी सुनहरा कल से जुड़ने के बाद वैज्ञानिक विधि सीखी। अब उत्पादन क्षमता काफी बढ़ गई है।
आधुनिक तरीके से मखाना प्रोसेसिंग
बहादुरपुर की किसान सुनीता देवी कहती है कि आईटीसी और कृषि विशेषज्ञों से प्रशिक्षण मिलने के बाद हमने महिला समूह एफपीओ बनाया। अब हम सिर्फ लावा बेचने के बजाय आधुनिक तरीके से मखाना प्रोसेसिंग करते हैं। जिससे आमदनी में इजाफा हुआ है।
जाले के रमेश यादव कहते हैं कि आइटीसी के सहयोग से उन्नत बीज और मखाना किट पर जानकारी मिली। खेती का नया तरीका सीखने से समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।
दूसरे व्यापारियों से मिलने का मौका
कमतौल के संजय सहनी कहते हैं कि आईटीआई की ओर से आयोजित मखाना महोत्सव में भाग लेने से हमें दूसरे व्यापारियों से मिलने का मौका मिला। अब हम अपने माल को सही दाम पर बेच पा रहे हैं। जिससे हमारी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

