वैष्णो देवी दरबार में 500 करोड़ का फ्रॉड! नकली चांदी मामले में एलजी सिन्हा ने की समीक्षा

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श्री माता वैष्णो देवी में श्रद्धालुओं के करोड़ों रुपये के चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर श्राइन बोर्ड अतिरिक्त सतर्क हो गया है। गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में वैष्णो देवी में करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान के प्रबंधन की समीक्षा करते हुए उपराज्यपाल ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर पारदर्शिता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत किया जाए।

आधिकारिक तौर पर कटड़ा में आयोजित इस बैठक को नियमित प्रशासनिक समीक्षा बताया गया, लेकिन सूत्रों के अनुसार, अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी और श्री माता वैष्णो देवी भवन में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई चांदी में बड़ी मात्रा में मिलावट सामने आने के बाद यह समीक्षा बैठक बुलाई गई।

इन दोनों मामलों ने देश के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में चढ़ावे की सुरक्षा, निगरानी और पारदर्शिता को लेकर नए सिरे से सवाल खड़े किए हैं। इसी पृष्ठभूमि में श्राइन बोर्ड ने अपनी पूरी व्यवस्था की समीक्षा की। बता दें कि उपराज्यपाल श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के चेयरमैन भी हैं।

बैठक में श्राइन बोर्ड के सदस्य व उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डा. मंदीप के. भंडारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन कुमार वैश्य, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक कुमार मौर्य सहित वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष और वर्चुअल माध्यम से जुड़े। बैठक में नकद चढ़ावे, दानपात्रों, ऑनलाइन दान, सोना-चांदी तथा अन्य बहुमूल्य धातुओं के संग्रह, गणना, सत्यापन, सुरक्षित भंडारण, परिवहन, बैंकिंग और आडिट की प्रत्येक प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा की गई।

सूत्रों के अनुसार, समीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि चढ़ावे के पूरे चक्र में कहीं भी मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश न्यूनतम रहे। अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया कि प्रत्येक चरण में बहुस्तरीय निगरानी, डिजिटल रिकार्डिंग, क्रास वेरिफिकेशन और नियमित आडिट की व्यवस्था लागू है।

बैठक में बहुमूल्य धातुओं के प्रबंधन पर भी विशेष फोकस रहा। अधिकारियों ने बताया कि सोना-चांदी के रूप में प्राप्त चढ़ावे के सुरक्षित भंडारण, परीक्षण, प्रसंस्करण और शोधन की प्रक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित प्रोटोकाल तथा भारत सरकार की अधिकृत टकसाल, हैदराबाद जैसी संस्थाओं के माध्यम से कराई जाती है। नकद चढ़ावे और अन्य वित्तीय लेनदेन भी बैंकिंग मानकों, वैधानिक प्रावधानों और निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुरूप संचालित किए जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में केवल मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा ही नहीं हुई, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की आशंका को समाप्त करने के लिए अतिरिक्त निगरानी उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। सुरक्षा, आडिट और जवाबदेही से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अधिकारियों को समयबद्ध समीक्षा जारी रखने के निर्देश दिए गए।

मानकों के अनुरूप किया जा रहा प्रबंधन

बैठक के अंत में श्राइन बोर्ड ने मौजूदा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र लागू है। बोर्ड का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था उसके लिए सर्वोच्च है और उनके द्वारा अर्पित प्रत्येक रुपये तथा बहुमूल्य धातु का प्रबंधन उच्चतम प्रशासनिक एवं वित्तीय मानकों के अनुरूप किया जा रहा है।

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