बांकीपुर उपचुनाव से पहले सियासी वार; उपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्‍वी यादव को दी नसीहत, RJD पर कही ये बात

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बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

जनसुराज में 3 बड़े नेताओं के इस्तीफों के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे ने विपक्षी खेमे में नई हलचल पैदा कर दी है।

इस घटनाक्रम को लेकर सत्तापक्ष को विपक्ष पर हमला बोलने का नया मौका मिल गया है। मृत्युंजय तिवारी ने गुरुवार को पार्टी में उपेक्षा और अपमान का आरोप लगाते हुए अपने सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी।

इस्तीफे के बाद शुक्रवार को उन्होंने राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात की। सिद्दीकी ने उन्हें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से मिलकर अपनी बात रखने की सलाह दी।

इसी बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा ने पूरे घटनाक्रम को लेकर राजद और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला।

‘राजद तो पहले से ही ध्वस्त पार्टी है’

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि “राजद तो पहले से ही ध्वस्त पार्टी है। नेता प्रतिपक्ष संवैधानिक रूप से विपक्ष के नेता जरूर हैं, लेकिन उनका कोई अता-पता नहीं रहता।”

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की अहम भूमिका होती है। सरकार की नीतियों और कमियों को जनता के सामने लाना तथा जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरना विपक्ष की जिम्मेदारी है।

लेकिन आवाज उठाएगा कौन। जब विपक्ष का नेता ही सक्रिय नहीं रहेगा तो पार्टी की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

बांकीपुर में चुनाव है, फिर भी नेता गायब

कुशवाहा ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में जब राज्य में महत्वपूर्ण उपचुनाव हो रहा है, नेता प्रतिपक्ष को बिहार में रहकर जनता के बीच सक्रिय होना चाहिए।उन्होंने कहा, उन्हें यहां होना चाहिए ताकि जनता की समस्याओं को उठाकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर सकें। अभी एक जगह चुनाव भी है, लेकिन वे गायब हैं। लोग कहते हैं कि वे विदेश में हैं, लेकिन कहां हैं, यह कौन जानता है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता है, लेकिन जवाबदेही भी

हालांकि उपेंद्र कुशवाहा ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को कहीं आने-जाने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता है, लेकिन संवैधानिक पद पर बैठे नेता की जनता के प्रति जवाबदेही भी होती है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता से जनता अपेक्षा करती है कि वह राज्य के मुद्दों पर सक्रिय रहे और सरकार को जवाबदेह बनाए। ऐसे में लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से अनुपस्थित रहना राजनीतिक रूप से उचित संदेश नहीं देता।

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