रेलवे स्टेशन पर आग की आहट मिलते ही तुरंत खुलेगा ‘रिले रूम’ का ताला, एसएंडटी स्टाफ की मौजूदगी की अनिवार्यता खत्म

आग की घटना के कारण ट्रेनों के सिग्नल सिस्टम में कोई खराबी न आए और ट्रेनें विलंबित न हो, इसके लिए बड़ा बदलाव लागू किया गया है। अब देश के किसी भी रेलवे स्टेशन पर आग लगने या आपातकालीन स्थिति में रिले रूम (वह कमरा जहां से ट्रेनों के सिग्नल कंट्रोल होते हैं) को स्टेशन मास्टर खोल सकेंगे।

उनके पास सीलबंद डिब्बे में एक अतिरिक्त चाबी हमेशा रहेगी। जैसे ही रिले रूम में धुआं दिखे या फायर अलार्म बजेगा, स्टेशन मास्टर सील तोड़कर दरवाजा खोल सकेंगे ताकि आग पर काबू पाया जा सके।यह फैसला मथुरा के पास बाद रेलवे स्टेशन के रिले रूम में लगी आग के दौरान चाबी मिलने में हुई 10 मिनट की देरी से सिग्नल सिस्टम जल जाने और घंटों ट्रेनें ठप रहने से सबक लेते हुए लिया गया है।किसी भी रेलवे स्टेशन का रिले रूम उस स्टेशन का कंट्रोल सेंटर है। यहीं से तय होता है कि कौन सी ट्रेन किस प्लेटफार्म पर आएगी और किसे लाल या हरा सिग्नल मिलेगा। सुरक्षा कारणों से यह कमरा हमेशा डबल लाक (दो तालों) में बंद रहता है। पहले नियम यह था कि तकनीकी टीम (एस एंड टी स्टाफ) की मौजूदगी के बिना इसे नहीं खोला जा सकता था।

अब आपातकालीन स्थिति में स्टेशन मास्टर चाबी का उपयोग करने के तुरंत बाद इसकी जानकारी रिले रूम रजिस्टर में दर्ज करेंगे और काम पूरा होने के बाद तकनीकी स्टाफ द्वारा इसे फिर से सील किया जाएगा। स्टेशन के हर रिले रूम में अब आधुनिक अग्निशमन यंत्र का होना अनिवार्य कर दिया गया है।

रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक सिग्नल रामेश्वर मीना ने इसके लिए आदेश जारी किया है। जिसे एनसीआर समेत सभी जोन में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि रिले रूम के लिए बोर्ड के सुरक्षा निर्देश लागू कर दिया गया है।

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