सदर अस्पताल चाईबासा के ब्लड बैंक से जुड़े एचआईवी (HIV) संक्रमण मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने दो वरिष्ठ डॉक्टरों को राहत दी है।
अदालत ने चाईबासा के तत्कालीन सिविल सर्जन सह सीएमओ डॉ. सुशांतो कुमार मांझी और मेडिकल ऑफिसर डॉ. दिनेश चंद्र की अग्रिम जमानत दे दी है। झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश सुनाया।
निचली अदालत से खारिज हो गई थी याचिका
गौरतलब है कि इसी मामले में दोनों आरोपित डॉक्टरों की अग्रिम जमानत याचिका बीती 30 मई 2026 को निचली अदालत से खारिज हो गई थी। निचली अदालत से राहत न मिलने के बाद दोनों अधिकारियों ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद अब दोनों डॉक्टरों को गिरफ्तारी से संरक्षण प्राप्त हो गया है। यह पूरा मामला चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से कथित रूप से संक्रमित खून चढ़ाए जाने के कारण पांच बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने से जुड़ा है।
जब यह गंभीर लापरवाही सामने आई, तो पूरे राज्य के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया था। ब्लड बैंक की निगरानी व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। इस साल 6 फरवरी को चाईबासा में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
जांच में सहयोग के आश्वासन पर मिली जमानत
जांच के दौरान पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ब्लड बैंक में रक्त संग्रहण, स्क्रीनिंग और वितरण की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की। इस दौरान तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही सामने आने पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि आरोपित पक्ष लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा है। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता हर्षित सहाय ने अदालत को आश्वासन दिया कि मामले की जांच अभी जारी है।
उनके मुवक्किल जांच प्रक्रिया में पूरी तरह सहयोग करने के लिए तैयार हैं। इसके बाद अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी। हालांकि, लापरवाही को लेकर कानूनी जांच आगे भी जारी रहेगी।


