जांच… FIR, गिरफ्तारी और छापेमारी के बाद अब बैठक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़ी 10 बड़ी बातें
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर आज का दिन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। आज सोमवार को श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक होने वाली है, जिसमें संभावना है कि ट्रस्ट की व्यवस्था में बड़े बदलाव के निर्णय हो सकते हैं। इस बहुप्रतीक्षित बैठक से पहले राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? आइए इन दस बिंदुओं के माध्यम से हम आपको बताते हैं-
इससे पहले आपको याद करा दें कि 2024 में राम मंदिर का उद्घाटन के बाद इस नव्य भव्य और दिव्य राम दरबार की प्रसिद्धि पूरे विश्व में फैली, जिसके चलते देश-दुनिया के कोने-कोने से आए लोगों ने राम मंदिर में दर्शन किए और साथ ही अमूल्य भेंट ट्रस्ट को प्रदान की।
इसके अलावा, महाकुंभ के आयोजन से भी अयोध्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, जिससे हजारों करोड़ रुपये का चंदा जमा हुआ। इस बीच कहीं न कहीं राम मंदिर में चढ़ाए गए और दान किए चंदे पर कुछ ऐसे तत्वों की नजर पड़ी, जिन्होंने आस्था की आड़ में सेवा की और मेवा खाने का प्रयास किया। हालांकि, चंदे की चोरी ज्यादा दिन छिपी नहीं और अब देश का सबसे चर्चित विषय बना हुआ है।
सपा प्रमुख ने उठाया था सवाल
सात जून को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कुछ रिपोर्टो का हवाला देकर राम मंदिर में चढ़ावा राशि की चोरी होने की बात कही और मामले में अदालत से स्वत: संज्ञान लेने की अपील की थी।
मामले ने तूल पकड़ा तो अखिलेश यादव के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि मंदिर का आंतरिक ऑडिट चल रहा है। उन्होंने साफ किया कि अभी तक जांच में ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया है जिससे चोरी के आरोपों की पुष्टि होती हो।
अगले दिन भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग कर दी, जिस पर पीएमओ ने संज्ञान लिया। इसके बाद ट्रस्टियों की बैठक में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से प्रकरण की जांच कराने का निर्णय लिया गया।
एसआईटी का गठन और पड़ताल शुरू
चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट ने मामले की जांच के लिए एसआईटी से करवाने का अनुरोध किया, जिसके बाद राज्य सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया।
पदाधिकारियों तथा मंदिर कर्मचारियों से पूछताछ
15 जून को एसआईटी अयोध्या पहुंची और ट्रस्ट के पदाधिकारियों तथा मंदिर कर्मचारियों से पूछताछ के बीच विशेष जांच दल (एसआईटी) ने दान में मिले आभूषणों की चोरी की आशंका पर भी पड़ताल शुरू की। एसआईटी ने पुराने रिकॉर्ड देखे और सीसीटीवी से संबंधित डिटेल की जांच की।
23 जून को एसआईटी ने मामले से जुड़ी अपनी विस्तृत रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी। रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्र व व्यवस्थापक गोपाल राव समेत लगभग डेढ़ सौ लोगों के बयान दर्ज किए गए।
चंपत राय के चालक रहे रामशंकर यादव टिन्नू और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के बयानों का भी मिलान किया गया। असमानता मिलने पर लगातार तीन दिन इन दोनों से पूछताछ हुई।
संदिग्ध पाए गए अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी, सुभाष श्रीवास्तव सहित ट्रस्ट व बैंक से जुड़े कुल 14 लोगों के लिखित बयान भी दर्ज किए गए।
25 जून को हुई बड़ी कार्रवाई
चढ़ावा चोरी मामले में 25 जून को बड़ी कार्रवाई हुई। ट्रस्ट की शिकायत पर अयोध्या की रामजन्मभूमि कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव को चढ़ावा चोरी का आरोपी बनाया गया। इन सभी पर बीएनएस की धारा 306, 316, 317 और 61 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही घंटे बाद पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
चंपतराय और अनिल मिश्र का इस्तीफा
27 जून को मामला उजागर होने के बाद से सवालों के घेरे में चल रहे ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय व सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। ट्रस्ट के सदस्य स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ ने इनके त्यागपत्र की पुष्टि की।
28 जून को पुलिस ने छह आरोपितों के सात अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस की छह टीमों ने आरोपितों के घर पहुंच परिजनों से पूछताछ की और संपत्ति खरीद व निवेश से संबंधित कागजात खंगाले। साक्ष्य के तौर पर इसकी प्रति भी सुरक्षित की।
11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक महत्वपूर्ण
आरोपों के चलते दो ट्रस्टियों के त्यागपत्र के बाद ट्रस्ट के पुनर्गठन की संभावना प्रबल हो उठी है। एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में भी पुनर्गठन की संस्तुति की और किसी प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बनाने की भी आवश्यकता जताई है। ऐसे में 11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक महत्वपूर्ण हो चली है।
धनराशि में कमी से चोरी की आशंका
प्रयागराज के महाकुंभ के दिनों में जब देश-विदेश से बड़ी संख्या में दर्शनार्थी आने लगे, तो रामलला को अर्पित की जाने वाली धनराशि व आभूषणों की मात्रा एकाएक काफी बढ़ गई थी। यह क्रम जनवरी से फरवरी माह तक चला। महाकुंभ समाप्त हुआ, तो पहले के सामान्य दिनों की अपेक्षा भी दान की नकदी काफी कमी मिलने लगी। गिनती के बाद जब बैंक में धनराशि जमा कराई जाती, तब भी पूर्व की अपेक्षा कमी पाई जाने लगी। इस पर चोरी की आशंका हुई।
अयोध्या में सेवा पूरी: चंपतराय
ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने बीते बुधवार को कहा कि उनकी अयोध्या में सेवा पूरी हो गई है, लेकिन यहां से कलंक लेकर वह वापस नहीं जाएंगे। करीबियों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके भरोसे पर विश्वासघात किया गया है। जांच पूरी हो जाने के बाद ही वह इस पर कुछ बोलेंगे।
तो सामने नहीं आता प्रकरण
चढ़ावा चोरी का यह प्रकरण शायद सामने भी नहीं आ पाता, यदि इसके सूत्रधार संघ व विहिप से जुड़े वे पदाधिकारी न बनते, जो मंदिर प्रबंधन में अपना दखल बढ़ाने को लेकर परेशान थे। इन्हीं लोगों ने रणनीति के तहत पहले सूचनाएं एकत्रित कीं, फिर ट्रस्ट पदाधिकारी को जानकारी देकर रंगे हाथ पकड़वाया। इसे छिपाने का प्रयास हुआ तो जानकारी लीक कर दी गई।
ट्रस्ट की अहम बैठक आज
आज सोमवार को ट्रस्ट की अहम बैठक होगी, जिसमें चढ़ावा गणना मामले में एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट, वित्त वर्ष 2025-26 की आडिट रिपोर्ट एवं अन्य वित्तीय पहलुओं पर चर्चा के अलावा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व ट्रस्टी अनिल मिश्र के त्यागपत्र पर विचार होगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

