यूं तो लोक निर्माण का ही नियम है कि पांच साल के अंदर ही सड़क की मरम्मत हो जाय, लेकिन विभाग खुद ही नियम तोड़ रहा है। आठ साल बाद भी गोंडा से बलरामपुर को जोड़ने वाली बाबागंज-उतरौला मार्ग की मरम्मत नहीं हो पाई है।
चार साल से इस सड़क के विशेष मरम्मत का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा था, जो स्वीकृत नहीं हुआ। इस वर्ष मार्च में 13 करोड़ से मरम्मत की स्वीकृति तो मिल गई लेकिन, तारकोल किल्लत ने पांचवी बार अड़चन डाल दिया।
अब बारिश शुरू होने वाली है तो फिर इसके विशेष मरम्मत की उम्मीद खत्म होती जा रही है। यह सड़क इस बार नहीं बनी तो इसका खामियाजा न सिर्फ गोंडा व बलरामपुर बल्कि सिद्धार्थनगर व नेपाल तक के लोगों को भी भुगतना पड़ेगा, क्योंकि इस मार्ग से जाने वाली रोडवेज बसों में डुमरियागंज,बढ़नी तक के यात्री आते जाते हैं।
49.400 किलोमीटर लंबी गोंडा-गुमड़ी-उतरौला सड़क का निर्माण 2018 में हुआ था, तब से इसकी मरम्मत नहीं हो पाई है, जबकि बलरामपुर में इसी सड़क के अगले हिस्से गुमड़ी-उतरौला मार्ग का दो साल पहले दोबारा नवीनीकरण हो गया।
गोंडा के हिस्से में पड़ रही 33 किलाेमीटर टूटी सड़क के नवीनीकरण के लिए पिछले चार वर्षों से लोक निर्माण विभाग प्रस्ताव शासन में भेजता है, लेकिन कार्य नहीं शुरू हो पाता है। चौथी बार 13 करोड़ की नवीनीकरण परियोजना भेजी गई थी।
इस बार किसी तरह से कार्य तो स्वीकृत हुआ, लेकिन वित्तीय सत्र के अंतिम सप्ताह में। जब तक कार्य शुरू होता तब तक वित्तीय वर्ष खत्म होने के कारण बजट समर्पण करना पड़ा। नया वित्तीय सत्र शुरू हुआ तो खाड़ी देशों में युद्ध के चलते तारकोल की किल्लत ने रोड़ा डाल दिया।
तारकोल किल्लत अब भी बनी हुई जबकि अब बारिश भी शुरू होने वाली है। ऐसे में इसके मरम्मत की उम्मीद पांचवी बार भी टूटती जा रही है। लोक निर्माण विभाग मरम्मत के नाम पर विभाग हर वर्ष पैच बनाता है, जो कुछ दिन में उखड़ कर गड्ढों में तब्दील हो जाते है।
इस मार्ग से गोंडा ही नहीं बलरामपुर,सिद्धार्थनगर व नेपाल तक के लोग बसों से आते जाते हैं,जो अक्सर सड़क के गड्ढों में फंसकर खड़ी हो जाती हैं। प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता पीके त्रिपाठी ने बताया कि बाबागंज-उतरौला रोड के नवीनीकरण का प्रस्ताव चार साल से शासन में अटका रहा। इस बार स्वीकृति मिली तो तारकोल किल्लत ने मुश्किलें खड़ी कर दीं है,जो अब तक बरकरार है।


