श्री हजूर साहिब बोर्ड पर नियंत्रण को लेकर विवाद, शिरोमणि अकाली दल ने महाराष्ट्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

 शिरोमणि अकाली दल ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा श्री हजूर साहिब प्रबंधन बोर्ड के आंतरिक कार्यों में कथित हस्तक्षेप को लेकर कड़ा विरोध जताया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे धार्मिक संस्थान की स्वायत्तता पर सीधा हमला बताया है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट ने एक नए प्रारूप कानून को मंजूरी दी है, जिसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। इस प्रस्ताव के जरिए श्री हजूर साहिब प्रबंधन बोर्ड की संरचना और कार्यप्रणाली में बदलाव किए जाने की तैयारी है।

शिरोमणि अकाली दल का आरोप है कि इस कदम से बोर्ड की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी और इसके संचालन में सरकार समर्थित व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें सिख संगत की सहमति प्राप्त नहीं होगी।

सिख समुदाय की भावनाएं आहत होंगी

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि यह निर्णय सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है और इससे ऐतिहासिक धार्मिक संस्थान के प्रबंधन पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि सिख समुदाय किसी भी स्थिति में इस तरह के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की है कि कैबिनेट द्वारा दी गई मंजूरी पर पुनर्विचार किया जाए और वर्ष 19 के कानून में किसी भी प्रकार का संशोधन न किया जाए। उनका कहना है कि यह कानून लंबे समय से श्री हजूर साहिब प्रबंधन की स्वायत्त व्यवस्था को सुनिश्चित करता आया है और उसमें छेड़छाड़ धार्मिक संस्थान की स्वतंत्रता को कमजोर करेगी।

अधिकारों व परंपराओं से जुड़ा है मामला

शिरोमणि अकाली दल ने दावा किया है कि यह मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि धार्मिक अधिकारों और परंपराओं से जुड़ा हुआ है। पार्टी का कहना है कि दुनिया भर की सिख संगत इस तरह के किसी भी बदलाव के खिलाफ है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस विवाद के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जहां एक तरफ सरकार की ओर से इसे प्रशासनिक सुधार बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे धार्मिक संस्थानों में सरकारी दखल के रूप में देखा जा रहा है।

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