सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को अगस्त्यमलाई क्षेत्र में जैव विविधता को नुकसान पहुंचाने वाली अवैध बस्तियों के अतिक्रमण को रोकने के लिए दो टूक सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त्यमलाई क्षेत्र में जैव विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र को अवैध बस्तियों द्वारा हो रहे अतिक्रमण से बचाने के उद्देश्य से तमिलनाडु की थलपति विजय की सरकार को दो टूक सुनाई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक महीने के भीतर हजारों अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए एक व्यापक और समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने का आदेश दिया है। इनमें से कुछ अतिक्रमणकारी दशकों से वहां बसे हुए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 28 अगस्त को होनी है। थलपति विजय ने बीते 10 मई को शपथ ली थी और तमिलनाडु में उनकी तमिलगा वेट्टी कषगम (TVK) पार्टी ने कई दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आदेश में अनुपालन सुनिश्चित करने में विफलता पर उच्च स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की चेतावनी भी दी है। बेंच ने तमिलनाडु सरकार को वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले 118 चिन्हित सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार उन पर अतिरिक्त जुर्माना लगा सकती है और उन्हें क्षतिपूर्ति वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण के पास उचित पर्यावरण क्षतिपूर्ति और बहाली शुल्क जमा करने के लिए कह सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को वन अतिक्रमण के लिए फटकार लगाई। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि तमिलनाडु सरकार के प्रयास ‘खोखले वादों’ तक ही सीमित रहे और स्थिति की गंभीरता और तात्कालिक जरूरत के मुताबिक पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दी, जिसके कारण अतिक्रमण जारी रहा और बढ़ता गया।
अगस्त्यमलाई भूभाग तमिलनाडु और केरल में फैला हुआ 3,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।
इसमें कन्याकुमारी वन्यजीव अभ्यारण्य, कलाकड़-मुंडनथुराई बाघ अभ्यारण्य, श्रीविल्लिपुथुर-मेगामलाई बाघ अभ्यारण्य और पेरियार बाघ अभ्यारण्य शामिल हैं।
यह बाघ, हाथी, तेंदुआ, भारतीय गौर, भालू, नीलगिरी लंगूर, भारतीय हॉर्नबिल और कई अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों का घर हैं।


