यूईआर-दो लिंक रोड भूमि अधिग्रहण: दिल्ली के किसान आर-पार की लड़ाई को तैयार

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यूईआर-दो से दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे लिंक रोड के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। रविवार को लाडपुर गांव स्थित दादा पौबारा मंदिर में हुई महापंचायत में दिल्ली देहात के कई गांवों से बड़ी संख्या में किसान जुटे और सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का संकेत दिया। किसान समिति ने कहा कि दो दिन बाद आंदोलन की आगे की रणनीति की घोषणा की जाएगी।

कंझावला, गढ़ी रिंढाला, सावदा, जौंती, रानीखेड़ा, लाडपुर, निजामपुर समेत आसपास के गांवों के किसानों ने एक स्वर में कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उपजाऊ जमीन का उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं करेंगे।

महापंचायत में किसानों ने 25 करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा, प्रत्येक प्रभावित परिवार को वैकल्पिक प्लॉट और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग दोहराई। किसानों का कहना है कि मौजूदा प्रस्तावित मुआवजे में आसपास खेती योग्य जमीन खरीदना संभव नहीं है।

जमीन जाने के बाद किसान यदि दोबारा जमीन ही नहीं खरीद पाएगा तो उसकी आजीविका और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य दोनों प्रभावित होंगे। इसलिए सरकार को मौजूदा बाजार स्थिति और नए सर्कल रेट को ध्यान में रखकर मुआवजा तय करना चाहिए।

सवाल : 2008 के रेट पर जमीन क्यों दें किसान?

महापंचायत में किसानों ने सरकार से सवाल किया कि 18 वर्षों में लोहे, सीमेंट और सोने के दाम कई गुना बढ़ गए हैं। अधिकारियों और नेताओं के वेतन में भी कई गुना वृद्धि हुई है, तो किसान अपनी पीढ़ियों से चली आ रही जमीन वर्ष 2008 के रेट पर क्यों दें? किसानों ने कहा कि जमीन उनके लिए केवल संपत्ति नहीं, बल्कि आजीविका और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार है। ऐसे में मुआवजा नए सर्कल रेट और वर्तमान बाजार मूल्य को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए।

95 प्रतिशत प्रभावित लोगों ने समय पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं

किसानों का दावा है कि करीब 95 प्रतिशत प्रभावित लोगों ने निर्धारित समय में अपनी आपत्तियां दर्ज करा दी हैं, लेकिन उनकी आपत्तियों और सुझावों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। किसानों ने सरकार से अपनी नीति और मंशा स्पष्ट करने की मांग की, ताकि प्रभावित परिवार अपने भविष्य को लेकर कोई ठोस निर्णय ले सकें।

अभी बातचीत व समाधान का खुला है रास्ता

महापंचायत में किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया गया तो सर्वे के बाद किसी भी निर्माण एजेंसी को आगे काम नहीं करने दिया जाएगा। किसानों ने कहा कि बातचीत और समाधान का रास्ता खुला है, लेकिन जबरन या अपर्याप्त मुआवजे के आधार पर जमीन लेने का विरोध जारी रहेगा।

नेताओं का मिला समर्थन

पूर्व कांग्रेस विधायक बवाना सुरेंद्र कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी किसानों के साथ खड़ी है। किसान मोर्चा, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष भाजपा देवेंद्र सोलंकी ने कहा कि हम किसानों के साथ हैं और जल्द ही समस्या का समाधान कराने का प्रयास करेंगे। मुंडका विधायक गजेंद्र दराल ने कहा कि वह किसानों के साथ हैं और सरकार से बातचीत चल रही है। यदि आंदोलन की स्थिति बनी तो वह किसानों के साथ खड़े रहेंगे। महापंचायत में राहुल डबास, आशीष, सुरेन्द्र, बलराज पहलवान समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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