हरियाणा में गोबर-कचरे व पराली से बनेगा ईंधन, किसानों की बढ़ेगी आय और युवाओं को मिलेगा रोजगार; लॉन्च होगी नई CBG नीति

1435 Shares

हरियाणा में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए प्रदेश सरकार गोबर, कचरे और फसल अवशेषों से ईंधन बनाने की नीति पर आगे बढ़ चली है। जल्द ही नई संपीड़ित बायो गैस (सीबीजी) नीति लागू करने की तैयारी है, जिसमें सीबीजी प्लांट लगाने के लिए लीज पर पंचायत भूमि, 40 करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता और 20 वर्ष तक बिजली शुल्क की प्रतिपूर्ति सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

प्रदेश में वर्तमान में 17 बायोगैस प्लांट संचालित है, जबकि छह और प्लांट जल्द ही खुलेंगे। अगले कुछ वर्षों में 100 प्लांट लगाने का लक्ष्य है। ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ ने नई नीति का ड्राफ्ट जारी करते हुए 15 दिन में हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।

सीबीजी प्लांट लगाने के इच्छुक उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों, डेयरियों और गोशालाओं को न केवल पहले पांच वर्षों तक दो रुपये प्रति यूनिट बिजली सहायता दी जाएगी, बल्कि विभिन्न करों में छूट के साथ भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) से राहत दी जाएगी।

पराली जलाने की समस्या से मिलेगी निजात

नई नीति के तहत पराली, पशु अपशिष्ट, शहरों के जैविक कचरे, चीनी मिलों के प्रेसमड, गन्ने के अवशेष और नेपियर घास जैसी सामग्री से कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के साथ ही पराली जलाने की समस्या से भी निजात मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।

नई सीबीजी नीति में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाली परियोजनाओं को विशेष प्राथमिकता मिलेगी। कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए प्रति प्रशिक्षु 20 हजार रुपये तक सहायता राशि का प्रविधान किया जाएगा। महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजनों और पूर्व सैनिकों को रोजगार देने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।

संयंत्रों से बनने वाली जैविक खाद खरीदने वाले किसानों को 50 पैसे प्रति किलोग्राम दिए जाएंगे। कृषि विश्वविद्यालय इसकी गुणवत्ता की निशुल्क जांच करेंगे। गोशालाओं, डेयरियों, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों को आनलाइन मंच से जोड़कर गांव स्तर पर गोबर, पराली और जैविक कचरे के संग्रह की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2030 तक तीन हजार टन प्रतिदिन, 2035 तक साढ़े 10 हजार टन प्रतिदिन और 2047 तक 43 हजार टन प्रतिदिन संपीड़ित बायोगैस उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।

मुख्य सचिव, ऊर्जा सचिव और उपायुक्तों की बनेंगी कमेटियां

नीति को संचालित करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 25 सदस्यीय राज्य स्तरीय समीक्षा व समन्वय समिति, ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय कार्यकारी समिति और प्रत्येक जिले में उपायुक्त की अध्यक्षता में 17 सदस्यीय जिला कंप्रेस्ड बायोगैस समन्वय समिति गठित भी किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *