गाजियाबाद बेसिक शिक्षा विभाग में बड़ा HRA घोटाला: गांवों में तैनात शिक्षकों ने लिया शहर का भत्ता, करोड़ों के राजस्व का नुकसान

बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को दिए जा रहे मकान किराया भत्ते (एचआरए) के भुगतान में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कोट गांव के राकेश कुमार सिंह ने ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों को शहरी क्षेत्र का एचआरए दिए जाने की शिकायत की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मई 2025 में मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर जांच कमेटी गठित की गई। जांच में कमेटी ने माना कि एचआरए में पिछले कई वर्षाें से अनियमितताएं मानते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के कुल 2,133 शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी कार्यरत हैं। शासनादेश के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में तैनात कर्मियों को ग्रामीण दर से तथा शहरी क्षेत्र में तैनात कर्मियों को शहरी दर से ही एचआरए दिया जाना चाहिए। आरोप है कि बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक और कर्मचारी, जो ग्राम पंचायत क्षेत्रों में कार्यरत हैं, उन्हें नगर निगम अथवा नगर पालिका क्षेत्र का अधिक दर वाला एचआरए दिया गया।

जांच दस्तावेजों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में 265 कर्मियों को नगर निगम क्षेत्र का एचआरए दिया जा रहा है। मोदीनगर विकास खंड में 363, मुरादनगर में 396, रजापुर क्षेत्र में 462 और लोनी विकास खंड में 255 शिक्षकों व कर्मचारियों को नियमों के विपरीत शहरी मकान किराया भत्ता भुगतान किया गया।

कुल मिलाकर 2,190 कर्मियों में से 453 को गलत श्रेणी का एचआरए दिए जाने के तथ्य सामने आए हैं। प्रति कर्मचारी औसतन 2700 से 5500 रुपये प्रतिमाह के अंतर को जोड़ा जाए तो अनुमानित करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व का नुकसान हो चुका है। नियमानुसार शहरी एचआरए का लाभ लेने के लिए शहरी सीमा में निवास प्रमाण पत्र आवश्यक है, लेकिन बड़ी संख्या में मामलों में बिना वैध प्रमाण के ही भुगतान कर दिया गया।

ऑडिट रिपोर्ट में अनियमित भुगतान पर आपत्ति

स्थानीय लेखा निधि परीक्षा इलाहाबाद की आडिट रिपोर्ट 2022-23 से 2023-24 तक करीब 6.76 करोड़ रुपये के अनियमित भुगतान की आपत्ति दर्ज की गई है। पुरानी रिपोर्ट में भी मुरादनगर, लोनी के ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों को गाजियाबाद की दर से एचआरए देने पर 2.18 करोड़ रुपये के अधिक भुगतान की आपत्ति दर्ज शामिल थी। वहीं 2015-16 व 2017-18 की रिपोर्ट में 1.22 करोड़ रुपये का अनियमित भुगतान पकड़े में आया था।

तत्कालीन सीडीओ अभिनव गोपाल ने मामले को गंभीरता को देखते हुए परियोजना निदेशक डीआरडीए, सहायक लेखाधिकारी उप निदेशक कृषि कार्यालय और सहायक अभियंता लघु सिंचाई को शामिल करते तीन सदस्यीय समिति गठित की थी, जिसमें बीएसए को जांच में पूर्ण सहयोग देने के निर्देश दिए थे।

शैक्षिक कर्मचारियों को श्रेणीवार एचआरए

विकास खंड शैक्षिक व कर्मी श्रेणी ए श्रेणी बी श्रेणी सी
नगर 265 265 00 00
भोजपुर 382 363 19 00
मुरादनगर 391 391 00 00
रजापुर 463 462 01 00
लोनी 689 255 433 01
योग 2190 1736 453 01

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