जिस वेनेजुएला के राष्ट्रपति को ट्रंप ने था उठाया, अब वहां सिक्का जमाएगा भारत; ONGC खरीदेगी ऑयल फील्ड!

मिडिल ईस्ट संघर्ष की वजह से भारत ही नहीं पूरी दुनिया इस समय तेल और गैस संकट से जूझ रही है। होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉकेज की वजह से यह संकट पैदा हुआ। इस संकट के बीच भारत ने कई कदम उठाए हैं। अब खबर है कि भारत की सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस लिमिटेड यानी ONGC वेनेजुएला में ऑयल फील्ड खरीदने को लेकर बातचीत कर रहा है। जी हां यह वही वेनेजुएला है जिसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका ने जनवरी 2026 में उठा लिया था। अमेरिकी सेना 3 जनवरी को वेनेजुएला के सिलिया फ्लोरेस से निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका ले गई थी। इस समय अमेरिका में ही मादुरो के खिलाफ मुकदमा चल रहा है।

वेनेजुएला के इस ऑयल फील्ड में ONGC के पास इतनी है हिस्सेदारी

भारत की ONGC, वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA से वहां के दो बड़े तेल क्षेत्रों (सैन क्रिस्टोबल और काराबोबो-1) में और हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रही है। यह खरीदारी ONGC की ग्लोबल शाखा, ONGC विदेश के जरिए उठाया जाएगा। अभी, ONGC विदेश के पास सैन क्रिस्टोबल में 40% और काराबोबो-1 में 11% हिस्सेदारी है, जबकि बाकी ज्यादातर हिस्सेदारी PDVSA के पास है।

तेल की कम कीमतों, इकोनॉमिक मिसमैनेजमेंट और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला के तेल उद्योग में लंबे समय से गिरावट देखी गई है। इस दौरान, वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA की परिचालन क्षमताएं भी काफी कमजोर हो गई हैं।

ONGC को वेनेजुएला में चाहिए अमेरिकी लाइसेंस

अगर यह डील हो जाती है, तो ONGC ‘सैन क्रिस्टोबल’ को पूरी तरह से चला सकती है और स्पेन की ‘रेप्सोल’ के साथ मिलकर ‘काराबोबो-1’ को मैनेज कर सकती है। स्पेन की रेप्सोल की काराबोबो-1 में 11% की हिस्सेदारी है।

जानकारों ने बताया कि यह प्रस्तावित अधिग्रहण इस बात पर निर्भर करता है कि ONGC को इन दो फील्ड्स को ऑपरेट करने के लिए US से लाइसेंस मिले। दूसरी कंपनियों को हाल ही में मिली मंजूरी से ONGC को उम्मीद है कि उसे भी लाइसेंस मिल जाएगा।

दोनों ऑयल फील्ड पर प्रोडक्शन में भारी गिरावट

सैन क्रिस्टोबल और काराबोबो, दोनों ही जगहों पर प्रोडक्शन में भारी गिरावट आई है। इन फील्ड्स से अभी कितना प्रोडक्शन हो रहा है, इसका पता नहीं चल सका है। 2024 में, ONGC ने इन दो फील्ड्स को चलाने के लिए US से प्रतिबंधों में छूट मांगी थी। ONGC विदेश के मैनेजिंग डायरेक्टर राजर्षि गुप्ता ने अगस्त 2024 में बताया था कि तब वेनेजुएला इन एसेट्स का ऑपरेशनल कंट्रोल ONGC को सौंपने के लिए सहमत हो गया था, हालांकि कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ था।

ONGC एक साल के अंदर इसे लगभग दोगुना (यानी 30,000 बैरल प्रति दिन तक) करना चाहती है और बाद में इसे 50,000 बैरल प्रति दिन तक ले जाना चाहती है। इस बढ़ोतरी से 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा का बकाया डिविडेंड वसूलने में मदद मिल सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *