दृष्टिबाधित एवं मूकबधिर छात्रा सारा मोइन के साहस और संघर्ष की गूंज अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने लगी है।
आईएससी 12वीं परीक्षा में 98.7 प्रतिशत अंक हासिल कर कालेज टापर बनीं सारा अब कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) में समान अवसर और आवश्यक सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।
बुधवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों से बातचीत के बाद गुरुवार को उस समय सारा और उनके परिवार की उम्मीदें और मजबूत हो गईं, जब देश के मुख्य दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. एस. गोविंद राज ने स्वयं उनके पिता मोइन अहमद से संपर्क कर मामले की जानकारी ली।
मोइन अहमद ने बताया कि मुख्य आयुक्त ने एनटीए अधिकारियों को पत्र भेजकर सारा को परीक्षा में विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने और 18 मई तक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
पत्र में सारा को अतिरिक्त समय देने, लैपटॉप आधारित परीक्षा की व्यवस्था करने और उनकी विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
वाइस कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बातचीत के दौरान मुख्य दिव्यांगजन आयुक्त ने सारा और उनके परिवार की बात गंभीरता से सुनी और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। इस संवाद के बाद सारा के चेहरे पर उम्मीद की नई चमक दिखाई दी।
बता दें कि मात्र छह वर्ष की उम्र में ‘सारकाइडोसिस’ बीमारी के कारण उन्होंने धीरे-धीरे देखने, सुनने और बोलने की क्षमता खो दी थी। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनकी मां जूली हामिद ने हार नहीं मानी और स्पर्श आधारित शिक्षा के माध्यम से सारा को पढ़ाई से जोड़े रखा।
आज अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर सारा लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। वहीं सलमान, जो हजरतगंज स्थित क्राइस्ट चर्च कालेज में दृष्टिबाधित शिक्षक हैं, उनके प्रयासों से सारा अब बोलने का भी प्रयास करने लगी हैं। सारा की परीक्षा 21 और 29 मई को है। 18 तक परीक्षा को लेकर निर्णय होने की संभावना है।


