गुरुग्राम शहर में बृहस्पतिवार सुबह ठीक 9 बजे जैसे ही सायरन बजा, लघु सचिवालय से लेकर शहर के बाढ़ के संवेदनशील इलाकों तक प्रशासनिक हलचल तेज हो गई।
कंट्रोल रूम में अफसर वायरलेस सेट और स्क्रीन पर नजरें टिकाए लगातार निर्देश देते दिखाई दिए। कुछ ही मिनटों में पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, एनडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें तय स्थानों की ओर रवाना हो गईं।
बसई तालाब क्षेत्र में पूरा दृश्य किसी वास्तविक बाढ़ आपदा जैसा नजर आया। पानी से घिरे इलाके में राहतकर्मी लाइफ जैकेट पहनकर नावों के जरिए लोगों तक पहुंचे। कुछ लोगों को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला गया तो कुछ को कंधों का सहारा देकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। मौके पर मौजूद मेडिकल टीम घायलों को तुरंत प्राथमिक उपचार देती दिखाई दी।
अंडरपास में फंसे लोगों को निकालने का अभ्यास
डीएलएफ फेज-1 और सिग्नेचर टावर अंडरपास को जलभराव प्रभावित क्षेत्र मानकर रेस्क्यू आपरेशन चलाया गया। सायरन और हूटर की आवाजों के बीच राहत टीमों ने पानी में फंसे लोगों को बाहर निकाला। पुलिसकर्मी ट्रैफिक रोककर रास्ता खाली करवाते नजर आए, जबकि फायर कर्मियों ने रस्सियों और उपकरणों की मदद से राहत कार्य किया।
एंबुलेंस पहुंचते ही शुरू हुआ इलाज, 23 घायलों को रेस्क्यू किया
मॉक ड्रिल के दौरान घायल बनाए गए लोगों को एंबुलेंस के जरिए सेक्टर-31 पाली क्लिनिक पहुंचाया गया। अस्पताल परिसर में डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम पहले से तैयार खड़ी थी। गंभीर घायलों को तुरंत इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया, जबकि अन्य को प्राथमिक उपचार दिया गया।23 घायलों को रेस्क्यू किया, जबकि अंडरपासों में डूबने से आठ लोगों की मौत दर्शाई गई।
कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर रही नजर
लघु सचिवालय स्थित इमरजेंसी आपरेशन सेंटर में अधिकारी लगातार अलग-अलग विभागों से अपडेट लेते रहे। बड़ी स्क्रीन पर अलग-अलग लोकेशन की लाइव गतिविधियां देखी जा रही थीं। टीम और जिला प्रशासन के अधिकारी पूरे अभ्यास की मानीटरिंग करते दिखाई दिए।
एनडीआरएफ, पुलिस और सिविल डिफेंस ने संभाला मोर्चा
मौके पर एनडीआरएफ जवानों की तेजी और समन्वय देखने लायक रहा। सिविल डिफेंस वालंटियर्स लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में जुटे रहे। पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर सुरक्षा व्यवस्था संभाली, जबकि बिजली विभाग की टीम ने करंट से बचाव को लेकर सतर्कता बरती।
एनएसएस और एनसीसी कैडेट्स भी रहे सक्रिय
एनएसएस और एनसीसी कैडेट्स भी राहत कार्यों में सक्रिय दिखाई दिए। कोई लोगों को सुरक्षित रास्ता दिखा रहा था तो कोई राहत सामग्री पहुंचाने में मदद कर रहा था। पूरे अभ्यास के दौरान ऐसा माहौल बना रहा मानो शहर सचमुच बाढ़ जैसी आपदा से जूझ रहा हो।


