मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना के लाभुकों के सत्यापन कार्य में जिलेभर में खुलेआम लूट मची हुई है। योजना के सत्यापन में लगी आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं पर गरीब महिलाओं से अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप लगा है। लाभुकों का कहना है कि बिना रुपये दिए सत्यापन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि
सत्यापन के नाम पर 500 से 1000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। रुपये नहीं देने वाली महिलाओं का सत्यापन रोककर उन्हें अयोग्य लाभुकों की सूची में डाल दिया जा रहा है। ज्यादा विरोध करने पर सूची में नाम नहीं होने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
बीते बुधवार को हुसैनाबाद प्रखंड के बेल बिगहा गांव में एक आंगनबाड़ी सेविका द्वारा 500 रुपये लेने का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया और हुसैनाबाद एसडीओ को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
इसके बावजूद संबंधित सेविका पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक गांव का मामला नहीं है, बल्कि पूरे जिले में सत्यापन के नाम पर गरीब महिलाओं का शोषण किया जा रहा है। इसके बावजूद जिला प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण लाभुकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
हैरानी की बात यह है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, जो गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के सम्मान और सहयोग के लिए शुरू की गई थी, उसी योजना में अब गरीब महिलाओं से वसूली की जा रही है। इस संबंध में उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।


