ऑपरेशन मेगाबुरु में मारे गए 17 माओवादियों पर घोषित इनाम सुरक्षा बलों में बंटेगा, एनआईए इनाम नहीं मिलेगा

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पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र में हाल ही में चलाए गए ऑपरेशन मेगाबुरु के दौरान 17 माओवादियों को मार गिराने वाले सुरक्षा बलों के बीच माओवादियों पर घोषित इनाम की राशि का वितरण किया जाएगा। हालांकि, यह तय किया जाएगा कि इनाम की राशि का वास्तविक हकदार कौन होगा और किसे कितनी रकम मिलेगी, इसका निर्णय चाईबासा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) की अनुशंसा और पुलिस मुख्यालय की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन में शामिल सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन इनाम वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और दिशा-निर्देशों के तहत ही की जाएगी। माओवादियों पर घोषित इनाम की राशि सीधे तौर पर सभी को नहीं मिलेगी, बल्कि इसका निर्धारण ऑपरेशन में भूमिका, योगदान और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर होगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि मारे गए माओवादियों पर झारखंड सरकार और ओडिशा सरकार द्वारा घोषित इनाम की राशि ही संबंधित सुरक्षा बलों को मिलेगी। इसके विपरीत, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा घोषित इनाम की राशि इस मामले में देय नहीं होगी। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एनआईए के नियमों के अनुसार इनाम की राशि केवल माओवादी की गिरफ्तारी की स्थिति में दी जाती है, न कि मुठभेड़ में मारे जाने पर।

बताया जा रहा है कि ऑपरेशन मेगाबुरु में मारे गए कई माओवादियों पर एनआईए ने भी अलग-अलग इनाम घोषित कर रखा था। हालांकि, चूंकि सभी माओवादी मुठभेड़ में मारे गए हैं और उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है, इसलिए एनआईए से घोषित इनाम की राशि सुरक्षा बलों को नहीं दी जाएगी।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इनाम वितरण को लेकर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाएगी। एसपी चाईबासा की अनुशंसा रिपोर्ट में यह उल्लेख किया जाएगा कि किस यूनिट या किस सुरक्षा बल की भूमिका कितनी प्रभावी रही। इसके बाद पुलिस मुख्यालय स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी और अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

ऑपरेशन मेगाबुरु को झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। इस अभियान से सारंडा क्षेत्र में माओवादियों की कमर टूटने का दावा किया जा रहा है। लंबे समय से यह इलाका नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है, जहां सुरक्षाबलों पर हमले और विकास कार्यों में बाधा आम बात थी।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस तरह के अभियानों से न सिर्फ माओवादियों का नेटवर्क कमजोर होगा, बल्कि सुरक्षाबलों का मनोबल भी बढ़ेगा। साथ ही, इनाम वितरण की स्पष्ट नीति होने से भविष्य में अभियानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

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