सिद्धार्थनगर में सरसों तेल में मिलावट का खुलासा, 22 नमूने जांच में फेल

 जिले में रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाले सरसों तेल की शुद्धता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच में सरसों तेल के 28 नमूनों में से 22 नमूने मानक पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें छह नमूनों में लेबलिंग संबंधी गड़बड़ी मिली, जबकि शेष नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई है। इससे जिले के लाखों उपभोक्ताओं की सेहत पर खतरा मंडराने लगा है।

विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 25 नमूने जांच के लिए भेजे थे। इसके अलावा वर्ष 2024-25 के लंबित तीन नमूनों की रिपोर्ट भी हाल ही में प्राप्त हुई। जांच में कई नमूनों की सपोनिफिकेशन, आयोडीन और रेंसी वैल्यू निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकती है।

सबसे चिंताजनक मामला बांसी कस्बे का सामने आया, जहां एक नमूने की आयोडीन वैल्यू 115 दर्ज की गई, जबकि सामान्य सीमा 112 से कम मानी जाती है। खाद्य सुरक्षा विभाग अब संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है। जिले में करीब सात लाख परिवार निवास करते हैं।

प्रतिमाह लगभग दो हजार किलोलीटर सरसों तेल की खपत होती है, जबकि लगन के मौसम में यह आंकड़ा ढाई से तीन हजार किलोलीटर तक पहुंच जाता है। जिले में सरसों का उत्पादन बेहद कम है। ऐसे में करीब 95 प्रतिशत लोग बाजार में उपलब्ध विभिन्न कंपनियों के तेल पर निर्भर हैं।

इसी तेल में मिलावट सामने आने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक मिलावटी तेल का सेवन करने से हृदय रोग, पेट संबंधी बीमारी, लीवर पर असर, त्वचा रोग और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।

सेहत के लिए नुकसानदेह मिलावटी तेल का सेवन
शहर के चिकित्सक डा. हिमांशु पाण्डेय ने बताया कि मिलावटी तेल का लगातार सेवन शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह है। इससे लीवर, किडनी और हृदय प्रभावित हो सकते हैं। कई बार रासायनिक मिश्रण वाले तेल से पेट संक्रमण, एलर्जी और फूड प्वाइजनिंग जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। खाद्य पदार्थों में मिलावट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -आरएल यादव, सहायक आयुक्त (खाद्य)-द्वितीय।

बरसात में बढ़ेगी निगरानी, माह भर चलेगा अभियान
बरसात के मौसम में तेल और घी की खपत बढ़ जाती है। गंदगी, नमी और सड़न के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी अधिक रहता है। इसे गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। अगले एक माह तक बाजारों, गोदामों और दुकानों से खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच कराई जाएगी।

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