12 दिन तक वह जिंदगी और मौत की जंग लड़ती रही। चेहरा, हाथ, सीना और शरीर का बड़ा हिस्सा आग की लपटों में झुलस चुका था, लेकिन उसके हौसले अब भी जिंदा थे। अस्पताल के बिस्तर पर लेटी वह परिवारजनों से बार-बार एक ही बात कहती थी।
मैं जीना चाहती हूं… आरोपित को सजा दिलवाना चाहती हूं, लेकिन शनिवार सुबह उसकी सांसें थम गईं और न्याय की लड़ाई लड़ने का उसका सपना अधूरा रह गया। पीजीआइ के प्लास्टिक सर्जरी वार्ड और बर्न यूनिट में उसका इलाज चल रहा था।
डॉक्टरों ने उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के कारण अंतिम समय तक उसकी हालत लगातार नाजुक बनी रही। युवती के जाने से परिवार में शोक की लहर फैल गई है। युवती के भाई समेत परिवार के अन्य सदस्यों का कहना है कि वह आरोपित को सख्त सजा दिलवाने क हर प्रयास करेंगे। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
‘मैं जल रही थी, पुलिस वीडियो बना रही थी’
इलाज के लिए जब युवती अस्पताल में भर्ती थी, तो इस दौरान दैनिक जागरण की टीम ने युवती से पीजीआइ जाकर बात की थी…बातचीत के दौरान युवती ने कहा था कि मैं जल रही थी..। साथ ही अपने मोबाइल से सामने खड़े पुलिस कर्मियों की वीडियो भी बना रही थी। वहीं, पुलिस मुलाजिम भी सामने से वीडियो बनने लगे।
वे कह रहे थे कि पहले औपचारिकता पूरी करो, फिर शिकायत दर्ज करेंगे। खुद को आग लगाते ही मेरे चीखने की आवाज सुन नजदीक में खेल रहे कुछ युवक भागते हुए चौकी के बाहर पहुंचे।
उन्होंने वीडियो बनाने के लिए मोबाइल निकाला तो उनको पुलिस वालों ने उन्हें भगा दिया। मैंने पुलिस से कार्रवाई करने के लिए आत्मदाह की धमकी दी, लेकिन जब एक नहीं सुनी गई तो मजबूरन खुद को आग लगानी पड़ी।


