IMF के साथ बातचीत खराब होने के बाद एशियाई विकास बैंक (ADB) पाकिस्तान का सहारा बनी है। गुरुवार को जारी एक खबर से जानकारी मिल रही है कि अगले पांच वर्ष में एडीबी बैंक पाकिस्तान को करीब 10 अरब अमेरिकी डॉलर का वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।।
मनीला स्थित इस ऋणदाता संस्था ने कहा कि यह सुविधा उसकी 2026-30 देश साझेदारी रणनीति (सीपीएस 2026-30) का हिस्सा है जिसे बुधवार को शुरू किया गया। समाचारपत्र ‘डॉन’ की खबर के अनुसार, बैंक ने कहा कि सीपीएस ‘‘ निजी क्षेत्र-नेतृत्व वाले विकास के माध्यम से देश को टिकाऊ एवं समावेशी वृद्धि की ओर ले जाने के लिए एक खाका प्रस्तुत करता है।’’ इसमें कहा गया, “ पांच वर्षीय रणनीति तीन मार्ग पर केंद्रित होगी। निजी क्षेत्र के विकास को सक्षम बनाना, समावेशन एवं सशक्तिकरण को आगे बढ़ाना और लचीलेपन व स्थिरता को मजबूत करना।’’
पाकिस्तान ने इस पर क्या कहा?
पाकिस्तान के लिए एडीबी की ‘कंट्री डायरेक्टर’ एम्मा फैन ने कहा, ‘‘ नई सीपीएस पाकिस्तान की संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान करने और मजबूत व दीर्घकालिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है, जिससे पूरे देश, विशेषकर गरीब व कमजोर वर्गों को लाभ होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ यह प्रमुख क्षेत्रों में रणनीतिक निवेश तथा सुधारों को बढ़ावा देती है ताकि आर्थिक वृद्धि को गति मिले एवं रोजगार सृजित हो। एडीबी इस महत्वाकांक्षी एजेंडे को लागू करने में पाकिस्तान के सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों का समर्थन करने के लिए तत्पर है।’’
एडीबी ने कहा कि पाकिस्तान का युवा कार्यबल और प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। निजी क्षेत्र-आधारित वृद्धि की ओर निर्णायक बदलाव इस क्षमता को बढ़ा सकते हैं जिससे अर्थव्यवस्था में परिवर्तन होगा एवं निरंतर निर्यात व निवेश-आधारित विस्तार संभव होगा। टिकाऊ एवं समावेशी वृद्धि की दिशा में बढ़ने के लिए हालांकि पाकिस्तान को कई संरचनात्मक बाधाओं का समाधान करना होगा। इनमें सीमित उत्पादन व निर्यात आधार, बोझिल कारोबारी माहौल और असंतुलित सार्वजनिक वित्त प्रबंधन शामिल हैं।
एडीबी ने कहा कि अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करने और अपने लाभों को दीर्घकालिक विकास में बदलने के लिए पाकिस्तान को स्थायी सुधार करने होंगे और उन्हें सुदृढ़ निवेश के साथ जोड़ना होगा। आर्थिक प्रदर्शन में सुधार का उल्लेख करते हुए एडीबी ने कहा कि उतार-चढ़ाव के दौर के बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था स्थिर हो गई है और वृद्धि की राह पर लौट आई है।


