आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में पूर्व नगर विधायक और कांग्रेस नेता अजीत शर्मा को एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने 16 अक्टूबर 2020 को कोतवाली थाने में दर्ज किए गए केस के पर्याप्त प्रमाण न होने के कारण यह आदेश सुनाया।
मामला और पृष्ठभूमि
इस मामले में अंचल अधिकारी संजय कुमार ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि 16 अक्टूबर 2020 को अजीत शर्मा अपने समर्थकों के साथ नामांकन जुलूस निकाल रहे थे। जुलूस की शुरुआत स्टेशन चौक से हुई और यह खलीफाबाग चौक की ओर बढ़ा।
शिकायत में यह आरोप था कि जुलूस में शामिल प्रत्याशी और उनके लगभग 500 समर्थकों ने कोरोना काल के दौरान सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया और मास्क का इस्तेमाल भी नहीं किया। इस जुलूस के चलते यातायात भी प्रभावित हुआ, जिससे राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
साक्ष्य और अदालत की राय
अंचल अधिकारी ने जुलूस की वीडियोग्राफी भी करवाई थी। इसके आधार पर उन्होंने इसे संज्ञेय अपराध मानते हुए आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज कराया।
हालांकि, ट्रायल के दौरान अदालत ने केस के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए। एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस सबूत के किसी भी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके चलते पूर्व नगर विधायक अजीत शर्मा को तत्काल प्रभाव से रिहा कर दिया गया।
कानूनी प्रक्रिया और महत्व
इस निर्णय से यह स्पष्ट हुआ कि साक्ष्य के अभाव में किसी भी चुनावी उल्लंघन का मामला सफलतापूर्वक साबित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे मामलों में दस्तावेजी प्रमाण और वीडियो फुटेज का महत्व और अधिक बढ़ गया है।


