मानपुर-डेहरी रेल प्रोजेक्ट से किसानों पर दोहरी मार, उपजाऊ जमीन और आजीविका प्रभावित

मानपुर से डेहरी-ऑन-सोन तक रेलवे ट्रैक बिछाने की परियोजना जहां एक ओर क्षेत्रीय विकास और बेहतर कनेक्टिविटी की संभावनाएं लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय किसानों के लिए यह कई गंभीर चुनौतियां भी खड़ी कर रही है। रेलवे लाइन निर्माण के कारण किसानों को उपजाऊ कृषि भूमि के नुकसान, सिंचाई व्यवस्था में बाधा, खेतों के विभाजन और आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

पहाड़पुर और कष्ट स्टेशन के बीच तक रेलवे लाइन का कार्य बहुत तेजी से चल रहा है। यह कार्य पूर्व मध्य रेलवे के उपमुख्य अभियंता निर्माण गयाजी शशि कुमार के देखरेख में किया जा रहा है। मानपुर क्षेत्र अंतर्गत फल्गु नदी में फ्लाई ओवर ब्रिज बनाने को लेकर अधिकरण कर पुल का निर्माण किया जा रहा है।

गया होकर गुजरने वाली स्पेशल मालगाड़ी रेलवे लाइन को ईस्ट डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के नाम से जाना जाता है। निर्माण कार्य काफी तेजी से चल रहा है। के निर्माण के बाद ग्रैंड कॉर्ड रेल खंड पर दबाव कमेगी मालगाड़ी इसी रेलवे लाइन से गुजरेगी।

रविंद्र कुमार का कहना है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा असर भूमि अधिग्रहण के रूप में सामने आया है। खंजाहापुर रेलवे लाइन के लिए उनकी उपजाऊ जमीन का एक बड़ा हिस्सा अधिग्रहित कर लिया गया, जिससे किसानों की जोत कम हो गई है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है।

किसान सुरज कुमार का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि रेलवे ट्रैक बनने से पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो गया है। कई जगहों पर जलभराव की स्थिति बन रही है, जबकि कुछ खेतों तक पानी पहुंचना मुश्किल हो गया है। इससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

किसान सिंटू प्रसाद ने बताया कि आवागमन की समस्या को प्रमुख बताया। उन्होंने कहा कि पहले वे आसानी से ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्रों को खेत तक ले जाते थे, लेकिन अब रेलवे लाइन के कारण रास्ते बंद हो गए हैं। इससे खेती का काम कठिन और समयसाध्य हो गया है।

कुंदन कुमार ने कहा कि रेलवे ट्रैक के कारण उनका खेत दो हिस्सों में बंट गया है। इससे खेती करना न केवल असुविधाजनक हो गया है, बल्कि लागत भी बढ़ गई है। एक ही खेत के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने में अतिरिक्त समय और संसाधन खर्च करने पड़ रहे हैं।

किसान मदन प्रसाद ने कहा कि मानपुर कुकरा रेल लाइन गुजरने से उनका खेत दो हिस्सों में बंट गया है। इससे खेती करना पहले की तुलना में अधिक कठिन और खर्चीला हो गया है। एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने में समय और श्रम दोनों अधिक लगते हैं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ रहा है।

वहीं, किसान नरेश मेहता के अनुसार, रेलवे ट्रैक के कारण खेतों तक जाने वाले पारंपरिक रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं। इससे किसानों को लंबा चक्कर लगाकर खेतों तक पहुंचना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं। कई जगहों पर वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई है।

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