कोयला नगरी धनबाद अब सिर्फ खनन के लिए नहीं, रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। शहर के युवा मेक्ट्रानिक्स इंजीनियर राजा ठाकुर द्वारा विकसित अत्याधुनिक कामीकेज सुसाइडल ड्रोन ने भारतीय सेना की ताकत को नई धार दी है।
स्थानीय स्टार्टअप विंटल लैब्स प्राइवेट लिमिटेड में तैयार यह ड्रोन सफल परीक्षणों के बाद सेना की जम्मू ब्रिगेड को सौंपा जा चुका है। यह ड्रोन लोइटरिंग म्युनिशन तकनीक पर आधारित है। यह लक्ष्य क्षेत्र में मंडराते हुए सही निशाना मिलते ही आत्मघाती हमला करता है।
स्टार्टअप के संस्थापक राजा ठाकुर ने बताया कई वर्षों के रिसर्च और परीक्षण के बाद तैयार यह ड्रोन अब सेना के जखीरे का हिस्सा बन चुका है। पिछले वर्ष 30 से अधिक ड्रोन की आपूर्ति की गई है और आगे भी मांग मिलने की संभावना है।
तकनीक ऐसी रडार भी चकमा खाए
इस ड्रोन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आटोनामस नेविगेशन और हाई-एक्सप्लोसिव वारहेड जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। यह बेहद कम ध्वनि और न्यूनतम दृश्य पहचान के साथ उड़ान भरता है। इससे दुश्मन के रडार भी इसे पकड़ नहीं पाते।
मिशन असफल होने पर यह खुद को नष्ट कर लेता है, ताकि तकनीक शत्रु के हाथ न लगे। ड्रोन की रेंज 40 से 100 किलोमीटर तक है और यह 30 से 60 मिनट तक हवा में रह सकता है। इसकी गति 80 से 120 किमी प्रति घंटा है। जीपीएस और इनर्शियल सिस्टम के जरिए यह बिना मानव हस्तक्षेप के तय लक्ष्य पर सटीक हमला करता है। 2.5 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम यह ड्रोन बंकर और सैन्य ठिकानों पर प्रभावी साबित हो सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों का बढ़ता भरोसा
विंटल लैब्स के ड्रोन का उपयोग भारतीय सेना के अलावा सीआइएसएफ, सीआइडी, एनएसजी, आइटीबीपी और राज्य पुलिस जैसे कई सुरक्षा बलों द्वारा किया जा रहा है। हाल ही में ओडिशा सीआइडी क्राइम ब्रांच को भी ड्रोन की आपूर्ति की गई है।
झारखंड पुलिस और ओडिशा जेल विभाग से भी बातचीत जारी है। कभी कोल कैपिटल के नाम से पहचाने जाने वाला धनबाद अब डिफेंस टेक्नोलाजी के नक्शे पर उभर रहा है। विंटल लैब्स ने एक साल में ही एक करोड़ रुपये से अधिक का टर्नओवर हासिल कर लिया है। साथ ही यह स्टार्टअप सरकारी स्कूलों में मुफ्त ड्रोन प्रशिक्षण देकर नई पीढ़ी को तकनीकी रूप से सशक्त बना रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

