पंजाब में 1158 सहायक प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों ने अपनी भर्ती रद्द होने के विरोध में 31 मार्च को नंगल में तीखा रोष प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इसी दिन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की नंगल में रैली प्रस्तावित है, जो शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के विधानसभा क्षेत्र में आयोजित की जा रही है। ऐसे में फ्रंट के सदस्यों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के घेराव की चेतावनी दी है।
फ्रंट के प्रतिनिधि डॉ. सोहेल ने बताया कि मौजूदा सरकार ने अदालत में इस मामले की प्रभावी पैरवी नहीं की और न ही समय रहते सही ढंग से पुनर्विचार याचिका दायर की। इसके चलते सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब के सरकारी कॉलेजों में लगभग 25 वर्षों बाद निकली इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से न केवल 1158 सहायक प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों का भविष्य प्रभावित हुआ है, बल्कि सरकारी कॉलेजों में पढ़ रहे लाखों गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों की पढ़ाई भी संकट में आ गई है।
कानून बना हो सकता है समस्या का हल
जसविंदर कौर ने आरोप लगाया कि सरकार चाहे तो सर्वोच्च न्यायालय में क्यूरेटिव याचिका दायर कर या विधानसभा में कानून बनाकर इस समस्या का समाधान कर सकती है। लेकिन सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है और निजी शिक्षण संस्थानों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री ने कई बार बैठक का आश्वासन दिया, लेकिन हर बार उसे पूरा नहीं किया गया।
भर्ती लंबित, दोबारा से भरने की हो रही बात
डॉ. परमजीत सिंह ने बताया कि सरकार अब इन पदों को दोबारा नए सिरे से भरने की बात कर रही है, जबकि वर्ष 2021 की भर्ती पिछले पांच वर्षों से लंबित है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चल रहे मानसिक तनाव के कारण एक सहायक प्रोफेसर बलविंदर कौर ने आत्महत्या कर ली, जबकि कई अन्य साथी गंभीर मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सरकारी कॉलेजों में दो हजार से अधिक पद पहले से खाली पड़े हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। फ्रंट के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आने वाले समय में पूरे पंजाब में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा।


