देहरादून: सरकारी दफ्तर या कूड़ाघर? डिस्पेंसरी रोड कांप्लेक्स में गंदगी का ‘राज’; जनता परेशान

शहर के बीचोंबीच बना राजीव गांधी मल्टीपरपज कांप्लेक्स सरकारी लापरवाही, गंदगी और अव्यवस्था की जीती-जागती तस्वीर बन चुका है।

जिस भवन में हर रोज हजारों लोग राशन कार्ड, तहसील, उपभोक्ता फोरम और रेरा जैसे जरूरी कामों के लिए पहुंचते हैं, वहां प्रवेश करते ही लोगों का सामना सड़ांध, कूड़े और बदबू से होता है। हालत ऐसी है कि लोग मुंह और नाक ढककर दफ्तरों तक पहुंचने को मजबूर हैं।

पूरी तरह चरमराई हुई सफाई और रखरखाव की स्थिति

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी कांप्लेक्स में जिला पूर्ति विभाग, सदर तहसील, उपभोक्ता फोरम, उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा), उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण और आवास सलाहकार परिषद जैसे अहम सरकारी कार्यालय हैं। इसके बावजूद सफाई और रखरखाव की स्थिति पूरी तरह चरमराई हुई है।

132 दुकानें, हजारों लोग… लेकिन सफाई नहीं

वर्ष 2013-14 में एमडीडीए की ओर से तैयार किए गए इस कांप्लेक्स में 132 दुकानें हैं। बड़ी संख्या में सरकारी दफ्तर होने के कारण यहां हर दिन भीड़ रहती है, लेकिन परिसर की पार्किंग से लेकर सीढ़ियों तक कूड़े के ढेर लगे हैं।

व्यापारी सरकारी विभागों को जिम्मेदार ठहराते हैं, जबकि अधिकारी दुकानदारों और आम लोगों को दोष देते हैं। नतीजा यह कि पूरा कांप्लेक्स ‘नो मैंस लैंड’ बन गया है। जहां सफाई-व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नजर नहीं आता।

सदर तहसील में बदबू के बीच काम कराने को मजबूर लोग

कांप्लेक्स के तीसरे तल पर स्थित सदर तहसील कार्यालयों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां प्रतिदिन हजारों लोग प्रमाण पत्र, जमीन और राजस्व संबंधी कामों के लिए पहुंचते हैं, लेकिन टायलेट की बदबू पूरे फ्लोर में फैली रहती है।

लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद हालात सुधरने को तैयार नहीं। एसडीएम सदर कार्यालय के पास तक गंदगी और दुर्गंध का असर रहता है। गर्मी बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर हो गई है।

डिस्पेंसरी रोड पर अतिक्रमण का कब्जा

कांप्लेक्स के बाहर डिस्पेंसरी रोड पर हालात और भी खराब हैं। सड़क पर फल-सब्जी की रेहड़ियां, ठेले और दुकानों के बढ़े हुए काउंटरों ने जगह घेर ली है। ऊपर से कांप्लेक्स में आने वाले लोगों के वाहन सड़क किनारे खड़े रहते हैं।

स्थिति यह है कि पैदल चलने वालों के लिए रास्ता तक नहीं बचा है। हर थोड़ी देर में जाम लगना यहां आम बात हो गई है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि नगर निगम, पुलिस और प्रशासन आखिर कब कार्रवाई करेंगे।

सीढ़ियों पर कूड़ा, दीवारों पर गुटखा

काम्पलेक्स की सीढ़ियां भी गंदगी से अटी पड़ी हैं। अंतिम मंजिल तक जगह-जगह कूड़े के ढेर और दीवारों पर गुटखा-तंबाकू की पीक दिखाई देती है। बदबू और गंदगी के बीच लोगों को सरकारी दफ्तरों तक पहुंचना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि राजधानी के प्रमुख सरकारी कांप्लेक्स की यह स्थिति है, तो शहर की बाकी व्यवस्थाओं का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अब सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी और जनता को इस नारकीय स्थिति से राहत कब मिलेगी।

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